विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार, वर्ष 2040 तक हर साल दुनियाभर में कोलोरेक्टल कैंसर के 32 लाख नए मामले और 16 लाख मौतें दर्ज हो सकती हैं। हर साल लाखों लोग इस बीमारी से जूझते हैं, जबकि यदि समय रहते इसका पता चल जाए, तो इसे आसानी से रोका जा सकता है। बड़ी आंत का कैंसर यानी कोलोन कैंसर ऐसी ही बीमारी है, जिसे शुरुआती चरण में पकड़ा जा सकता है। अच्छी बात यह है कि एक साधारण टेस्ट से कैंसर के शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचानकर इलाज किया जा सकता है।
सिर्फ एक टेस्ट से बदल सकती है ज़िंदगी
अमेरिका के एक प्रसिद्ध डॉक्टर ने एक महिला का उदाहरण देते हुए बताया कि सिर्फ 31 साल की उम्र में उसे कोलोन कैंसर हो गया। उन्होंने कहा, “कम उम्र में कोलोन कैंसर होना चौंकाने वाला है और यह दिखाता है कि हमें शरीर में होने वाले बदलावों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।” डॉक्टर ने जिस जांच पर ज़ोर दिया, वह है कोलोनोस्कोपी, जो समय पर करवाई जाए तो जान बचा सकती है।
क्या है कोलोन कैंसर
कोलोन कैंसर बड़ी आंत के उस हिस्से में होता है जिसे कोलोन कहा जाता है। इसमें आंत की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। यह कोलोरेक्टल कैंसर का हिस्सा होता है, जिसमें कोलोन और रेक्टम दोनों प्रभावित होते हैं। अगर समय पर इसका पता न लगाया जाए तो यह शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता है और जीवन के लिए खतरा बन सकता है।
कोलोनोस्कोपी क्या है और क्यों ज़रूरी है
कोलोनोस्कोपी एक जांच प्रक्रिया है, जिसमें डॉक्टर कैमरे की मदद से बड़ी आंत के अंदर का निरीक्षण करते हैं। इस दौरान प्रिकैंसरस पॉलिप्स यानी कैंसर से पहले बनने वाली गांठों को पहचानकर समय रहते हटा दिया जाता है, जिससे कैंसर पनप ही नहीं पाता। यह टेस्ट शुरुआती चरण में कैंसर को पकड़ने का सबसे प्रभावी तरीका है। यदि सही समय पर कोलोनोस्कोपी करवा ली जाए, तो बीमारी से पूरी तरह बचाव संभव है।
क्या कोलोनोस्कोपी से डरना चाहिए
कई लोग इस टेस्ट से डरते हैं, दर्द या शर्मिंदगी की वजह से। लेकिन वास्तव में, यह जांच हल्की बेहोशी में की जाती है, जिसमें व्यक्ति को कोई तकलीफ महसूस नहीं होती। टेस्ट के दौरान आप सोते रहते हैं और प्रक्रिया आराम से पूरी हो जाती है। थोड़ी असुविधा ज़रूर हो सकती है, लेकिन यह आपकी ज़िंदगी की सुरक्षा के मुकाबले बहुत छोटी बात है।
किन लोगों को कोलोनोस्कोपी करवानी चाहिए
• 45 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी लोगों को नियमित रूप से कोलोनोस्कोपी करानी चाहिए।
• यदि परिवार में किसी को कोलोरेक्टल कैंसर हुआ है, तो जांच जल्दी शुरू करनी चाहिए।
• जिन लोगों को लंबे समय से पाचन या पेट से जुड़ी समस्याएं हैं, उन्हें भी डॉक्टर की सलाह से यह टेस्ट कराना चाहिए।





