
जमशेदपुर के सिदगोड़ा में ढाई साल के मासूम रौनक वीर की हार्ट अटैक से मौत ने पूरे शहर को गहरे शोक में डुबो दिया। बच्चे की मां निकिता कौर बेसुध हैं, जबकि डॉक्टरों का कहना है कि हाल के वर्षों में बच्चों में हार्ट अटैक के मामले चिंताजनक रूप से बढ़े हैं। ऐसे में समय रहते लक्षणों को पहचानकर तुरंत इलाज कराना बेहद जरूरी है।
दर्दनाक हादसे से परिवार टूटा
यह घटना सिदगोड़ा 10 नंबर बस्ती पदमा रोड की है। दोपहर करीब 12 बजे रौनक अपनी दो बहनों जसकिरत (10) और प्रभकिरत (8) के साथ खेल रहा था। कुछ देर बाद वह कमरे में जाकर पलंग पर लेट गया। जब मां निकिता उसे उठाने गईं, तो वह बिल्कुल शांत और ठंडा पड़ा था। घबराए परिजन उसे तुरंत मर्सी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उसका दिल धड़कना बंद हो चुका है (कार्डियक अरेस्ट)। इसके बाद उसे टीएमएच ले जाया गया, लेकिन वहां भी डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। रविवार को अंतिम संस्कार हुआ। रौनक के पिता परविंदर सिंह एक आईटी कंपनी में मैनेजर हैं, जबकि दादा राजेंद्र सिंह बारीडीह गुरुद्वारा के पूर्व प्रधान रह चुके हैं। परिवार के लिए यह दूसरा गहरा सदमा है—सिर्फ पांच महीने पहले दादी की भी हार्ट अटैक से मौत हुई थी।
ऐसे मामले पहले भी सामने आए हैं
• 30 मई 2025: सिदगोड़ा में ही 14 वर्षीय साईं की हार्ट अटैक से मौत हुई थी।
• 15 अक्टूबर 2019: टेल्को शिक्षा निकेतन की कक्षा एक की छात्रा की स्कूल में हार्ट अटैक से मौत हो गई थी।
इन घटनाओं ने डॉक्टरों और अभिभावकों को गहरी चिंता में डाल दिया है।
बढ़ते आंकड़े दे रहे चेतावनी
• इंडियन हार्ट जर्नल (2024) के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में भारत में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामले 35% बढ़े हैं।
• एम्स दिल्ली की एक स्टडी बताती है कि हर एक लाख बच्चों में 2–4 बच्चे अचानक हृदय रुकने की समस्या का सामना करते हैं।
• अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, दुनिया भर में हर साल करीब 12,000 बच्चे कार्डियक अरेस्ट से जान गंवाते हैं। पहले जहां इसे बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, अब यह बच्चों और किशोरों में भी तेजी से बढ़ रहा है।
बच्चों में हार्ट अटैक की संभावित वजहें
• जन्मजात हृदय दोष
• कावासाकी रोग (रक्त वाहिनियों में सूजन)
• कोरोनरी धमनी की असामान्यताएं
• रक्त का गाढ़ा होना (जैसे प्रोटीन C/S की कमी)
• सीने में गंभीर चोट
लक्षण जिन्हें न करें नज़रअंदाज़
• सीने में दर्द या जकड़न
• सांस फूलना
• अत्यधिक पसीना या थकान
• चक्कर आना या बेहोशी
• छोटे बच्चों में दूध पीने में परेशानी या चिड़चिड़ापन
बच्चों का दिल कैसे रखें सुरक्षित
• हर साल ईसीजी और ईको जैसी हृदय जांच करवाएं।
• ताजा और घर का बना खाना दें, जंक फूड से बचाएं।
• नियमित शारीरिक गतिविधि कराएं।
• परिवार में हृदय रोग का इतिहास होने पर लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराते रहें।
हालांकि बच्चों में दिल का दौरा दुर्लभ होता है, लेकिन जब होता है तो यह गंभीर आपात स्थिति बन जाती है। इसलिए जैसे ही किसी बच्चे में सांस फूलना, छाती में दर्द या अचानक चक्कर आने जैसे लक्षण दिखें, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।






