यूपी: फर्रुखाबाद के कोचिंग सेंटर में धमाका मीथेन से नहीं, बारूद से हुआ! ‘सबूत’ मिला

शनिवार दोपहर करीब तीन बजे कोचिंग सेंटर में हुए धमाके में दो छात्रों की मौत और सात अन्य घायल हो गए। इस गंभीर घटना को प्रदेश सरकार ने संज्ञान में लिया है और किसी भी स्तर पर ढिलाई न बरतने के निर्देश दिए हैं।

सेंट्रल जेल के पास स्थित लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर में धमाके के बाद रविवार को कन्नौज की फॉरेंसिक टीम, लखनऊ बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वायड ने घटनास्थल की गहन छानबीन की। जांच के दौरान फॉरेंसिक टीम को सुतली का अधजला गुच्छा मिला, जिससे आशंका गहरी हो गई कि विस्फोट मीथेन गैस से नहीं, बल्कि बारूद से हुआ है। हालांकि, अधिकारी फिलहाल आधिकारिक रूप से कुछ भी कहने से बच रहे हैं। घटनास्थल पर लगातार पुलिस की तैनाती है और अफसरों का आना-जाना जारी है।

धमाके में दो छात्रों की मौत, सात घायल
फर्रुखाबाद के कादरीगेट थाने के सातनपुर मंडी और सेंट्रल जेल चौराहे के पास स्थित कोचिंग सेंटर में धमाके से दो छात्रों की मौके पर ही जान चली गई जबकि सात अन्य घायल हो गए। रविवार सुबह लखनऊ से बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वायड ने मौके पर पहुंचकर सबूत इकट्ठा किए। लगभग डेढ़ घंटे तक पूरे भवन की बारीकी से जांच की गई।

फॉरेंसिक टीम ने पाया अधजला सुतली का गुच्छा
कन्नौज फॉरेंसिक टीम के प्रभारी डॉ. प्रवीन कुमार श्रीवास्तव ने अधीनस्थों के साथ जांच की और घटनास्थल से बड़ा अधजला सुतली का गुच्छा बरामद किया। इससे साफ संकेत मिले कि धमाका मीथेन गैस से नहीं, बल्कि विस्फोटक पदार्थ से हुआ है। टीम ने कांच, पत्थर और ईंट-प्लास्टर के नमूने भी जुटाए।

मृतक छात्रों की दर्दनाक हालत
विस्फोट में मारे गए छात्र आकाश सक्सेना (24) और आकाश कश्यप (22) की हालत बेहद भयावह थी। एक का कमर से नीचे का हिस्सा उड़ गया, जबकि दूसरे का हाथ और पैर गायब हो गया। सात घायल छात्रों के शरीर में कांच और एल्युमिनियम के टुकड़े धंस गए। यह विस्फोट कोचिंग सेंटर के रिसेप्शन क्षेत्र में हुआ, जहां छात्र मौजूद थे।

पोस्टमार्टम पर भी उठे सवाल
शनिवार रात दोनों छात्रों का पोस्टमार्टम कराया गया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों की डॉक्टर के कमरे में मौजूदगी पर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि आमतौर पर ऐसा नहीं होता।

जांच के दायरे में मोबाइल कॉल डिटेल
सूत्रों के अनुसार, आसपास के लोगों के मोबाइल नंबर और कॉल डिटेल खंगाले जाएंगे ताकि घटना के समय हुई बातचीत और संदिग्ध गतिविधियों का पता चल सके।
डॉ. प्रवीन कुमार श्रीवास्तव (प्रभारी, फॉरेंसिक टीम कन्नौज) का कहना है, “फिलहाल कुछ भी तय कहना जल्दबाजी होगी। मौके से मिले सुतली, कांच और ईंट-प्लास्टर के नमूनों की प्रयोगशाला जांच के बाद ही सच सामने आएगा।”

👉 अब सबकी नजरें जांच रिपोर्ट पर हैं, जो यह तय करेगी कि यह हादसा था या किसी गहरी साजिश का हिस्सा।

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