
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर 40 दिनों की पैरोल दी गई है। उसे बार-बार दी जा रही पैरोल को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का आरोप है कि एक सजायाफ्ता कैदी को इतनी बार और कम अंतराल में पैरोल मिलना कानून के समान और निष्पक्ष अनुपालन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। रोहतक की सुनारिया जेल में बंद राम रहीम को 40 दिन की पैरोल मंजूर हुई है। यह उसकी 15वीं पैरोल/फरलो होगी। जानकारी के अनुसार, वह रविवार शाम या सोमवार सुबह जेल से रिहा होकर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के लिए रवाना होगा। इसको लेकर जेल परिसर और आसपास के इलाकों में पुलिस सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
गौरतलब है कि साध्वी यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वर्ष 2017 से राम रहीम रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहा है। इससे पहले अगस्त 2025 में भी वह 40 दिनों की पैरोल पर जेल से बाहर आया था और उस दौरान पूरी अवधि सिरसा डेरे में ही बिताई गई थी। इस बार भी उसकी पैरोल सिरसा डेरे में ही कटने की संभावना है।
कानूनी प्रक्रिया के तहत, किसी कैदी के निश्चित अवधि तक सजा काटने और अच्छे आचरण के आधार पर पैरोल या फरलो दी जाती है। हालांकि, पैरोल की अवधि को सजा में नहीं जोड़ा जाता, जबकि फरलो की अवधि सजा की गणना में शामिल की जाती है। राम रहीम वर्ष 2025 में तीन बार जेल से बाहर आया—फरवरी और अप्रैल में 21-21 दिनों की फरलो पर तथा अगस्त में 40 दिनों की पैरोल पर। वहीं, वर्ष 2017 से अब तक उसे कुल 14 बार पैरोल या फरलो मिल चुकी है। मौजूदा पैरोल के साथ वह 15वीं बार जेल से बाहर आएगा।





