कांग्रेस ने किया था संविधान का अपमान- राजेन्द्र राठौड़

जयपुर में कांग्रेस की ‘संविधान बचाओ रैली’ पर राजेन्द्र राठौड़ का तीखा हमला

जयपुर के रामलीला मैदान में सोमवार को आयोजित कांग्रेस की ‘संविधान बचाओ रैली’ पर राजस्थान के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने जोरदार पलटवार किया। राठौड़ ने कांग्रेस पर संविधान का अपमान करने और राजनीतिक लाभ के लिए संवेदनशील मुद्दों, जैसे आतंकी हमलों, का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।

“पहलगाम हमले पर कांग्रेस की राजनीति शर्मनाक”
राठौड़ ने कहा कि जब पूरा देश पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर शोक व्यक्त कर रहा था, तब कांग्रेस ने रैली कर सरकार पर निशाना साधने के लिए इस घटना का राजनीतिक उपयोग किया। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस को अपने अतीत पर तनिक भी शर्म होती तो वह ‘संविधान बचाओ’ का नाटक करने के लिए सड़कों पर नहीं उतरती। राठौड़ ने कांग्रेस पर आतंकी हमले जैसी दर्दनाक घटनाओं को भी राजनीतिक हथियार बनाने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का संविधान पूरी तरह सुरक्षित और सम्मानित है और जनता अब कांग्रेस की “सस्ती राजनीति और दिखावे” को अच्छी तरह पहचान चुकी है।

“संविधान का असली अपमान कांग्रेस ने किया”
कांग्रेस के इतिहास पर प्रहार करते हुए राठौड़ ने कहा कि सत्ता में रहते हुए कांग्रेस ने कई बार संविधान की मूल भावना को कुचला। उन्होंने 1975 के आपातकाल को लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला बताया और कहा कि 75 वर्षों में से 65 वर्षों तक शासन करने के बावजूद कांग्रेस ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर दिया।

“डॉ. अंबेडकर के साथ कांग्रेस ने किया अन्याय”
राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे महापुरुष का अपमान किया, उन्हें चुनाव में हराया और भारत रत्न देने से वंचित रखा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ही अंबेडकर जी के विचारों और आदर्शों को सच्चा सम्मान मिला है। मोदी सरकार ने बाबा साहेब के जीवन से जुड़े पाँच स्थलों को ‘पंचतीर्थ’ के रूप में विकसित किया और 26 नवंबर को ‘संविधान दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया।

“कांग्रेस अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है”
राठौड़ ने कटाक्ष करते हुए कहा कि संविधान खतरे में नहीं है, असल संकट कांग्रेस पार्टी के अस्तित्व का है। उन्होंने कहा कि देश की जनता अब समझ चुकी है कि कांग्रेस संविधान की रक्षा के नाम पर सिर्फ अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश कर रही है।

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