जैसलमेर बस हादसा: डीएनए सैंपल से हो रही मृतकों की पहचान, आग में 20 यात्रियों की दर्दनाक मौत

जैसलमेर से जोधपुर जा रही एक निजी एसी स्लीपर बस में मंगलवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। देखते ही देखते बस आग का गोला बन गई, जिसमें महिलाएं और बच्चों सहित 20 यात्रियों की जिंदा जलकर मौत हो गई। 15 गंभीर रूप से झुलसे लोगों को जोधपुर रेफर किया गया है। बस में कुल 57 यात्री सवार थे, जिनमें से अधिकतर जैसलमेर और पोकरण के बीच के गांवों के निवासी थे। हादसा जैसलमेर-जोधपुर मार्ग पर वॉर म्यूजियम के पास हुआ। बस के पिछले हिस्से से धुआं निकलते ही कुछ यात्रियों ने खिड़कियों से कूदकर जान बचाई। सेना के जवान और मेडिकल टीम मौके पर पहुंची, जबकि दमकल की गाड़ियां करीब 50 मिनट बाद घटनास्थल पर पहुंचीं। आग पर काबू पाने के बाद राहत कार्य शुरू किया गया। रात साढ़े आठ बजे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घटनास्थल का दौरा किया। केंद्र सरकार ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

डीएनए से हो रही पहचान
एफएसएल की अतिरिक्त निदेशक डॉ. शालू मलिक ने बताया कि शवों की पहचान के लिए डीएनए जांच कराई जा रही है। फिलहाल केवल एक मृतक, जैसलमेर निवासी हुसैन की पहचान हो पाई है। बाकी 19 शव और एक हड्डियों की पोटली जोधपुर पहुंच चुकी है। परिवारों के दो-दो सदस्यों के डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं ताकि मृतकों की सही पहचान की जा सके। झुलसे घायलों का इलाज जारी है।

फायर सेफ्टी में लापरवाही
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के 45 से 50 मिनट बाद तक फायर ब्रिगेड नहीं पहुंची। सेना ने जेसीबी की मदद से बस का दरवाजा तोड़कर यात्रियों को बाहर निकाला। बस में इमरजेंसी गेट सिर्फ पीछे था, जबकि दोनों ओर होना जरूरी था। बस में फायर सेफ्टी उपकरणों की भी कमी बताई गई है। लोगों का कहना है कि अगर सुरक्षा उपकरण मौजूद होते तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।

यात्रियों की आंखों के सामने मौत
एक यात्री ने बताया कि उन्होंने खुद 16 शव बस से निकलते देखे, अंदर कई और लाशें थीं। झुलसे यात्रियों में आठ साल के बच्चे से लेकर 79 वर्ष तक के बुजुर्ग शामिल हैं। अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल था। स्थानीय लोगों ने एंबुलेंस से लाए गए घायलों को अपने कंधों पर ट्रॉमा सेंटर तक पहुंचाया। कई परिजन रोते-बिलखते अपने प्रियजनों को ढूंढते रहे।
हादसे में कुल 20 लोगों की जान गई है। बुकिंग एजेंट से पूछताछ करने पर पता चला कि कुछ टिकट पहले से बुक थीं, बाकी बस में ही दी गईं। बस बिल्कुल नई थी, 1 अक्टूबर को ही इसका रजिस्ट्रेशन हुआ था और यह तीसरी यात्रा पर निकली थी।

शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट से एसी वायरिंग में आग लगने और ज्वलनशील सामग्री के कारण आग तेजी से फैलने की बात सामने आई है। -राजेश मीणा आई जी (जोधपुर रेंज)

“यह अत्यंत हृदयविदारक घटना है। दिवंगत आत्माओं को प्रभु श्रीराम अपने श्रीचरणों में स्थान दें। राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है।” -भजनलाल शर्मा मुख्यमंत्री

विशिखा मीडिया

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