जेएनयू के छात्रसंघ चुनाव देशभर की छात्र राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। तारीखों की घोषणा के साथ ही कैंपस में बहसों, पोस्टरों और विचारधाराओं की भिड़ंत का माहौल बनने लगा है। आने वाले दिनों में देखना दिलचस्प होगा कि इस बार जेएनयू का जनादेश किसके पक्ष में जाता है।
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के बाद अब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में भी छात्रसंघ चुनावों की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। लंबे इंतज़ार के बाद चुनाव समिति ने 2025-26 सत्र के लिए पूरा चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया है। लोकतंत्र के इस बड़े छात्र उत्सव की शुरुआत 24 अक्टूबर से होगी, जब प्रारंभिक मतदाता सूची जारी की जाएगी।
24 अक्टूबर से शुरू होगी चुनावी प्रक्रिया
24 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक छात्र अपने नाम, कोर्स या अन्य विवरणों में सुधार कर सकेंगे। इसके बाद 25 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक नामांकन फॉर्म वितरित किए जाएंगे। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 27 अक्टूबर तय की गई है, जो सुबह 9:30 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। 28 अक्टूबर को सुबह 10 बजे वैध नामांकनों की सूची जारी होगी, और दोपहर 2 से 5 बजे तक नाम वापस लेने का मौका मिलेगा। उसी दिन शाम 7 बजे अंतिम उम्मीदवारों की सूची घोषित की जाएगी। इसके बाद रात 8 बजे प्रेस ब्रीफिंग में प्रचार के लिए स्थानों का आवंटन किया जाएगा।
कैंपस में लौटेगा चुनावी माहौल
जेएनयू में छात्रसंघ चुनाव सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि छात्र राजनीति का उत्सव माने जाते हैं। 29 से 31 अक्टूबर के बीच स्कूल जनरल बॉडी मीटिंग्स होंगी, जहां उम्मीदवार छात्रों से सीधे संवाद करेंगे। इसके बाद 1 नवंबर को यूनिवर्सिटी जनरल बॉडी मीटिंग होगी, जिसमें सभी स्कूलों के छात्र एक साथ अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को सुनेंगे। 2 नवंबर को होने वाली प्रेसिडेंशियल डिबेट सबसे प्रमुख आकर्षण रहेगा, जहां अध्यक्ष पद के उम्मीदवार आमने-सामने अपनी नीतियों और विचारधाराओं पर चर्चा करेंगे।
3 नवंबर को ‘नो कैंपेन डे’, 4 नवंबर को मतदान
3 नवंबर को ‘नो कैंपेन डे’ रखा गया है ताकि छात्र बिना किसी प्रचार के दबाव के स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकें। 4 नवंबर को दो सत्रों में मतदान होगा, पहला सुबह 9 से दोपहर 1 बजे तक और दूसरा दोपहर 2:30 से शाम 5:30 बजे तक। मतदान समाप्त होने के बाद रात 9 बजे से मतगणना शुरू हो जाएगी। चुनाव समिति के अध्यक्ष रवि कांत ने बताया कि इस बार पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष रखने के लिए विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिकायत निवारण सेल भी बनाई है, जो किसी भी विवाद या शिकायत की सुनवाई करेगी।
पिछले साल का समीकरण
पिछले वर्ष वामपंथी छात्र संगठनों ने चार में से तीन प्रमुख पदों पर जीत हासिल की थी, जबकि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने करीब एक दशक बाद जॉइंट सेक्रेटरी पद जीतकर सबको चौंका दिया था। इस बार फिर वामदलों, एबीवीपी और स्वतंत्र उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला देखने की संभावना है।






