बिहार में भाजपा ने अपने हिस्से की सीटों में से पिछड़ा वर्ग के 6 यादव समेत कुल 24 और अति पिछड़ा वर्ग के 16 उम्मीदवारों को मौका दिया है। वहीं, राजपूत, भूमिहार और कायस्थ समाज के 49 प्रत्याशियों को मैदान में उतारकर सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की गई है।
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों का असर उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भी गहराई से पड़ेगा। इसलिए यूपी के भाजपा नेताओं की निगाहें बिहार के परिणामों पर टिकी हुई हैं। भाजपा ने बिहार में टिकट वितरण से लेकर सामाजिक और जातीय समीकरणों को मजबूत करने तक कई अहम निर्णय लिए हैं। चुनाव परिणामों से मिलने वाले संकेतों के आधार पर पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की रणनीति तय करेगी। इससे पहले पंचायत चुनावों में इस रणनीति का परीक्षण भी किया जाएगा। बिहार चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने टिकट बंटवारे के दौरान पिछड़े और दलित वर्ग को प्राथमिकता देकर यह संदेश दिया है कि यूपी में भी इसी फॉर्मूले पर सियासी रणनीति बनाई जाएगी।
एनडीए के घटक दल जदयू ने भी टिकट वितरण में जातीय समीकरणों का खास ध्यान रखा है। लोकसभा चुनाव के पैटर्न को दोहराते हुए उसने पिछड़े, दलित और कुशवाहा समाज के उम्मीदवारों को अधिक तवज्जो दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा के टिकट बंटवारे से यह साफ हो गया है कि भाजपा यूपी में विपक्ष को चुनौती देने के लिए पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके लिए लखनऊ से दिल्ली तक लगातार मंथन चल रहा है। प्रदेश भाजपा के रणनीतिकारों ने इस दिशा में काम शुरू भी कर दिया है। पार्टी के अभियानों में भी इसी सामाजिक संतुलन पर फोकस किया जा रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि भाजपा पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) गठजोड़ की चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तैयारी में जुटी है।
बिहार में एनडीए की रणनीति:
भाजपा ने अपने हिस्से की सीटों पर पिछड़ा वर्ग के 6 यादव समेत 24 और अति पिछड़ा वर्ग के 16 उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि राजपूत, भूमिहार और कायस्थ समाज के 49 प्रत्याशियों को मौका मिला है। अनुसूचित जाति वर्ग में पार्टी ने सबसे अधिक टिकट पासवान समुदाय को दिए हैं। वहीं, जदयू ने अपने हिस्से में पिछड़ा वर्ग के 37 और अति पिछड़ा वर्ग के 22 उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें 8 यादव शामिल हैं। ऐसे में यह माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में भी एनडीए इसी जातीय संतुलन वाले फॉर्मूले को दोहराएगा।
सूत्रों के अनुसार, बिहार में सत्ता में वापसी के लिए भाजपा ने माइक्रो लेवल पर रणनीति तैयार की है। इसके तहत पार्टी ने कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने और मौजूदा विधायकों के कामकाज पर फीडबैक जुटाने के लिए लोकसभावार क्लस्टर मॉडल अपनाया है। अगर यह रणनीति सफल रहती है, तो उत्तर प्रदेश में भी इसे लागू किया जाएगा।





