दिल्ली: आवारा कुत्तों के हमले में घायल महिला ने मांगा 20 लाख रुपये का मुआवजा

दिल्ली हाई कोर्ट ने आवारा कुत्तों के हमले में घायल एक महिला की याचिका पर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) से जवाब मांगा है। यह मामला इस साल की शुरुआत का है, जब सड़क पर कई आवारा कुत्तों ने एक महिला पर बुरी तरह हमला किया था। इस घटना के बाद महिला ने 20 लाख रुपये का मुआवजा मांगते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उनका कहना है कि इस हमले से उन्हें शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से गंभीर क्षति हुई है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में एमसीडी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। महिला ने अपने मुआवजे की गणना के लिए 2023 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा तैयार किए गए मानक का हवाला दिया है। इसमें दांतों के निशानों की संख्या और त्वचा से मांस के अलग होने की गंभीरता को आधार बनाया गया है। दरअसल, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 18 अगस्त 2023 को आदेश दिया था कि कुत्ते के काटने के मामलों में प्रत्येक दांत के निशान पर कम से कम 10,000 रुपये का मुआवजा दिया जाए, और जहां मांस त्वचा से अलग हुआ है, वहां प्रति 0.2 सेंटीमीटर पर 20,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाए।
यह घटना 7 मार्च को दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित खिड़की विलेज रोड के पास हुई थी, जब एक महिला मोटरसाइकिल पर पीछे बैठी थीं और कुत्ते ने उनके पैर पर हमला कर दिया। इस संबंध में मई में नोटिस जारी किया गया था। बाद में 29 अक्टूबर को न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने एमसीडी को जवाब देने के लिए और समय दिया।

शरीर पर कुत्तों के काटने के 42 निशान
महिला प्रियंका राय ने बताया कि हमले के बाद उनके शरीर पर 42 दांतों के निशान और कुल 12 सेंटीमीटर लंबे घाव हुए। पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के मुआवजा मानक के अनुसार, यह करीब 12 लाख रुपये बनता है। इसके अलावा, उन्होंने प्रत्येक दांत के निशान पर 10,000 रुपये की दर से 4.2 लाख रुपये और मानसिक आघात के लिए 3.8 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की है।
प्रियंका राय, जो एक बैंक में सहायक शाखा प्रबंधक हैं, का कहना है कि इस हमले के बाद वह लंबे समय तक भय में रहीं और उस इलाके से बाहर निकलने में डर महसूस करती थीं। उनके वकील ने बताया कि हालांकि अन्य उच्च न्यायालयों के आदेश बाध्यकारी नहीं होते, परंतु जब तथ्य समान हों, तो उनके निर्णयों का प्रभावकारी महत्व होता है। राय का यह भी कहना है कि इस हमले के कारण उन्हें गंभीर मानसिक तनाव, शारीरिक परेशानी और लंबे इलाज के चलते काम से छुट्टी लेनी पड़ी, जिससे उनके वेतन और करियर पर नकारात्मक असर पड़ा।

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