दिल्ली ब्लास्ट: 26 जनवरी को थी बड़े हमले की साजिश

दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। अब दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने धमाके में इस्तेमाल हुई हुंडई i20 कार की पूरी मूवमेंट डिटेल्स ट्रेस कर ली हैं।

सोमवार शाम लालकिला क्षेत्र में हुए विस्फोट की जांच में पता चला है कि सफेद रंग की यह i20 कार और इसका ड्राइवर उमर नबी, धमाके से कुछ घंटे पहले दिल्ली के कनॉट प्लेस और मयूर विहार जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में देखे गए थे। जांच में यह भी सामने आया है कि शक से बचने के लिए उमर नबी ने धमाके से कुछ घंटे पहले कार को चांदनी चौक की सुनहरी मस्जिद की पार्किंग में खड़ा कर दिया था। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, यह कार 10 नवंबर दोपहर 3:19 बजे पार्किंग में दाखिल हुई और करीब 6:48 बजे बाहर निकली।
जांच एजेंसियों को जानकारी मिली है कि यह कार 29 अक्टूबर से 10 नवंबर तक अलीगढ़ की अल-फलाह यूनिवर्सिटी कैंपस में खड़ी थी। उसी स्थान पर एक स्विफ्ट डिजायर कार भी मिली, जो फरीदाबाद से गिरफ्तार किए गए आरोपी डॉ. मुजम्मिल शकील के नाम पर रजिस्टर्ड है। अब तक की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि धमाके में इस्तेमाल कार डॉ. शाहीन सईद की थी। पुलिस ने शाहीन के ठिकाने से असॉल्ट राइफल्स और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया है। एजेंसियों को शक है कि इस नेटवर्क को विदेशी आतंकी फंडिंग चैनल से संचालित किया जा रहा था। रिपोर्टों के अनुसार, गिरफ्तार डॉ. मुजम्मिल ने पूछताछ में खुलासा किया कि उसने और उमर नबी ने लालकिला क्षेत्र की पहले रेकी की थी और अगले वर्ष 26 जनवरी को बड़े आतंकी हमले की योजना बनाई गई थी। उसने यह भी बताया कि दिवाली पर भीड़-भाड़ वाले इलाके में धमाका करने का इरादा था, लेकिन उसे अंजाम नहीं दिया गया।

विस्फोट में मिलिट्री ग्रेड का बारूद
फॉरेंसिक जांच में घटनास्थल से मिले सैंपल्स में अमोनियम नाइट्रेट के साथ हाई-ग्रेड मिलिट्री एक्सप्लोसिव के अंश पाए गए हैं। सोमवार शाम 6:52 बजे हुए इस धमाके से आसपास की कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त हुईं और 10 से अधिक लोगों की मौत हो गई। सूत्रों के मुताबिक, अपने साथियों की गिरफ्तारी के बाद उमर नबी घबरा गया था और पुलिस कार्रवाई के डर से उसने कार में रखा बम समय से पहले ही डिटोनेट कर दिया, जिससे पूरा विस्फोट नहीं हो सका।
प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि आईईडी सही ढंग से असेंबल नहीं हुआ था, इसलिए विस्फोट आंशिक रूप से हुआ। घटनास्थल पर न तो कोई गहरा गड्ढा मिला और न ही मेटल प्रोजेक्टाइल्स के निशान। इंटेलिजेंस एजेंसियों का मानना है कि पूरा मॉड्यूल विदेश में बैठे एक हैंडलर के इशारों पर काम कर रहा था। अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इस नेटवर्क के विदेशी कनेक्शन, डिजिटल ट्रांजेक्शन और ऑनलाइन कम्युनिकेशन चैनलों की गहराई से जांच कर रही हैं।

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