
संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से आरंभ हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार सुबह 10 बजे संसद के हंस द्वार पर मौजूदा सत्र में सरकार के विकास से जुड़े एजेंडे के बारे में जानकारी देंगे। यह सत्र तीन सप्ताह तक चलेगा और कुल 15 बैठकें निर्धारित की गई हैं।
विपक्ष ने पहले ही संकेत दे दिया है कि वह 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), दिल्ली में हुए आत्मघाती विस्फोट तथा दिल्ली-एनसीआर की गंभीर प्रदूषण समस्या जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग करेगा, जिससे सत्र में हंगामे की संभावना बढ़ गई है। वहीं सरकार ने 19 दिसंबर तक चलने वाले इस सत्र में असैन्य परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने सहित 13 विधेयकों के जरिए अपने सुधार एजेंडे को बढ़ाने की तैयारी कर ली है।
रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में सरकार ने अपनी विकास प्राथमिकताएँ साझा करते हुए विपक्ष से सत्र को शांतिपूर्वक चलाने में सहयोग की अपील की। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने एसआईआर, दिल्ली धमाके और प्रदूषण पर तुरंत चर्चा कराए जाने की मांग रखी। यह सत्र बिहार विधानसभा चुनावों में एनडीए की भारी जीत की पृष्ठभूमि में हो रहा है और अनुमान है कि इस बार सरकार आर्थिक सुधारों पर अधिक ध्यान देगी। सरकार ने विपक्ष को आश्वस्त किया कि नियमों के अनुरूप सभी विषयों पर चर्चा कराई जाएगी।
सर्वदलीय बैठक में 36 दलों के 50 से अधिक नेता उपस्थित रहे। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और अर्जुन राम मेघवाल ने सरकार की ओर से सहभागिता की, जबकि बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की।
सत्र में पेश किए जाने वाले प्रमुख विधेयक
- जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) बिल
- इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड संशोधन बिल
- मणिपुर जीएसटी (दूसरा संशोधन) बिल
- रिपीलिंग एंड अमेंडिंग बिल
- राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) बिल
- एटॉमिक एनर्जी बिल
- कॉर्पोरेट लॉज (संशोधन) बिल
- सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड बिल
- इंश्योरेंस लॉज (संशोधन) बिल
- आर्बिट्रेशन एंड कंसीलिएशन (संशोधन) बिल
- हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बिल
- सेंट्रल एक्साइज (अमेंडमेंट) बिल
- हेल्थ सिक्योरिटी और नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल
सुरक्षा चूक पर सवाल
बैठक में दिल्ली के वायु प्रदूषण और हालिया फिदायीन हमले का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठा। विपक्ष ने हमले को गंभीर सुरक्षा चूक बताया और तत्काल चर्चा की मांग की। साथ ही, विपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदूषण से निपटने में सरकार विफल रही है और विपक्ष शासित राज्यों के विधेयक तथा फंड जानबूझकर रोके जा रहे हैं। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार संविधान और नियमों के अनुसार हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार है तथा महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में विपक्ष से सहयोग की उम्मीद करती है।
कांग्रेस संसदीय दल के उपनेता तरुण गोगोई ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के माध्यम से मतदाता सूची से लाखों नाम हटाए जा रहे हैं, जो “वोट चोरी” के समान है। बिहार के बाद अन्य राज्यों में भी शिकायतें मिल रही हैं, इसलिए संसद में तुरंत चर्चा कराई जानी चाहिए। उधर, सरकार ने अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि एसआईआर एक स्वायत्त और संवैधानिक संस्था का प्रशासनिक कार्य है, जिस पर सरकार संसद में जवाबदेह नहीं हो सकती। सरकार ने यह भी कहा कि बिहार में एसआईआर प्रक्रिया सफल रही है और सुप्रीम कोर्ट ने भी बताया है कि एक भी शिकायत दर्ज नहीं हुई।





