गोवा नाइटक्लब आग हादसे में 25 लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार माने जा रहे क्लब मालिक लूथरा ब्रदर्स को थाईलैंड के फुकेत स्थित एक होटल से गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसी बीच दिल्ली में उनकी जमानत याचिका पर रोहिणी कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई।
बर्च बाय रोमियो लेन क्लब के मालिक गौरव लूथरा और सौरभ लूथरा की गिरफ्तारी के बाद भारतीय एजेंसियां उन्हें भारत लाने की तैयारियों में जुट गई हैं। सूत्रों के अनुसार दोनों को शुक्रवार तक भारत लाया जा सकता है। गुरुवार को रोहिणी कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर ने पक्ष रखा। बुधवार को भी अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर कोर्ट ने गोवा सरकार से जवाब मांगा था। गुरुवार को सुनवाई के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वंदना ने जमानत याचिका खारिज कर दी।
अदालत में वकील तनवीर अहमद मीर ने दलील दी कि लूथरा ब्रदर्स कारोबारी हैं और हजारों लोगों को रोजगार देते हैं। उन्होंने दावा किया कि दोनों भाई हादसे के कारण नहीं, बल्कि व्यावसायिक यात्रा पर विदेश गए थे। मीर ने तर्क दिया कि यह मामला हत्या का नहीं, बल्कि लापरवाही से हुई मौत का है और इस पर हत्या के इरादे का आरोप लगाना अनुचित है। उन्होंने यह भी कहा कि लूथरा ब्रदर्स नीरव मोदी या विजय माल्या जैसे आर्थिक अपराधी नहीं हैं। बावजूद इसके अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया और जमानत याचिका खारिज कर दी। पुलिस ने अदालत में कहा कि लूथरा ब्रदर्स ने जांच में सहयोग नहीं किया और अदालत को गलत जानकारी दी। गोवा पुलिस का दावा है कि वे 6 दिसंबर की रात ही भारत से निकल गए थे, जबकि उनकी ओर से 7 दिसंबर की तारीख बताई गई। पुलिस ने मेडिकल ग्राउंड पर दी गई दलील को भी गलत ठहराया।
हादसे के बाद देशभर में भारी आक्रोश था। लूथरा ब्रदर्स की तलाश में गोवा पुलिस और सीबीआई ने इंटरपोल की सहायता ली। गुप्त जानकारी के आधार पर भारतीय और थाई एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई कर फुकेत के एक होटल से उन्हें गिरफ्तार किया। अब उनका इमिग्रेशन प्रोसेस पूरा होने के बाद उन्हें भारत लाया जाएगा, जहां उनसे विस्तृत पूछताछ की जाएगी। गोवा पुलिस उनके खिलाफ आरोप तय कर चार्जशीट दाखिल करेगी। इससे पहले गोवा पुलिस ने दोनों भाइयों के पासपोर्ट भी निलंबित कर दिए थे। थाईलैंड ने इस मामले में भारत का पूरा साथ दिया है, जबकि आमतौर पर विदेशी धरती से आरोपियों को भारत लाना कठिन होता है।
रोहिणी कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई पूरी कर अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने माना कि एफआईआर लापरवाही से हुई मौत से संबंधित है, लेकिन पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे और गलत जानकारी देकर कोर्ट को गुमराह किया। सुनवाई के दौरान गोवा पुलिस ने कहा कि गौरव और सौरभ लूथरा के अलावा अजय गुप्ता भी इस प्रोजेक्ट के हस्ताक्षरकर्ता हैं। पंचायती लाइसेंस की अवधि समाप्त हो चुकी थी और उसका नवीनीकरण भी नहीं कराया गया था। पुलिस ने कहा कि आरोपियों के सहयोग न करने के कारण उन्हें किसी अतिरिक्त सुरक्षा का लाभ नहीं मिलना चाहिए। वहीं बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि गिरफ्तारी बदले की भावना में नहीं की जा सकती। उनका कहना था कि 90 प्रतिशत जांच उनके बिना पूरी हो चुकी है और पुलिस ने यह नहीं बताया कि हिरासत की आवश्यकता क्यों है। इस बीच राज्य प्रशासन ने भीषण आग के बाद अवैध नाइटक्लबों पर कार्रवाई तेज कर दी है। वगतोर स्थित क्लब को कृषि भूमि पर अवैध निर्माण पाए जाने पर सील कर दिया गया है। क्लब प्रबंधन से सात दिनों में जवाब मांगा गया है। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले सभी नाइटक्लबों पर तुरंत कार्रवाई की जाए।






