
बांग्लादेश में हालिया चुनाव परिणामों ने संकेत दिया है कि शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग अब भी प्रभावशाली स्थिति में है। वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए तारिक रहमान विवादों से दूर रहकर राष्ट्रीय हित में कदम उठा रहे हैं, ताकि उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी का जनाधार मजबूत हो सके।
जब 2001 में बीएनपी सत्ता में थी, तब भारत के साथ उसके संबंध तनावपूर्ण रहे थे। लेकिन फरवरी 2026 में चुनाव जीतने के बाद रहमान द्वारा लिए जा रहे निर्णय नई दिल्ली के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं। यह बदलाव इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि मोहम्मद यूनुस के 18 महीने के शासनकाल में भारत-बांग्लादेश संबंध काफी बिगड़ गए थे, यहां तक कि बांग्लादेशी क्रिकेट टीम विश्वकप खेलने भी भारत नहीं आई थी। अब स्थिति तेजी से बदलती दिख रही है। बांग्लादेश ने भारत में सभी वीज़ा और कॉन्सुलर सेवाएँ दोबारा शुरू कर दी हैं और क्रिकेट संबंध बहाल करने के लिए वार्ता भी प्रारंभ की है। नई दिल्ली ने भी रिश्तों में नया अध्याय शुरू करने के संकेत दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रहमान को जीत की बधाई देने वाले पहले वैश्विक नेता थे। उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को रहमान की मां व पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया के अंतिम संस्कार में भेजा, जबकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला शपथ ग्रहण में ढाका पहुँचे।
यूनुस की नीतियों से दूरी
सरकार संभालने के पहले सप्ताह में ही रहमान ने कई बड़े संकेत दिए। बीएनपी सांसदों ने यूनुस द्वारा गठित संविधान सुधार परिषद में शपथ लेने से इंकार कर दिया। रहमान ने ‘जुलाई चार्टर’ के कई प्रस्तावों जैसे द्विसदनीय संसद और राष्ट्रपति की विस्तारित शक्तियों पर भी आपत्ति जताई।
छात्र नेताओं की चेतावनी
छात्र आंदोलन से निकली नेशनल सिटीजन पार्टी ने चुनाव में सिर्फ छह सीटें जीतीं। इसके नेता नाहिद इस्लाम ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन की चेतावनी दी, हालांकि चुनावी प्रदर्शन कमजोर रहा।
सलाहकारों का बाहर जाना
यूनुस के करीबी और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण से जुड़े विशेष सहायक फ़ैज अहमद तैयब जर्मनी चले गए। एनसीपी नेता नासिरुद्दीन पटवारी ने दावा किया कि कई सलाहकार देश छोड़ने की तैयारी में हैं और उन्हें जाने से पहले संपत्ति व कार्यकाल का विवरण देना चाहिए। द डेली स्टार ने तैयब के प्रस्थान को “अचानक विदाई” बताया।
प्रशासनिक फेरबदल
रहमान ने यूनुस के करीबी अधिकारियों को हटाना शुरू किया है। नई दिल्ली में तैनात प्रेस मंत्री फैसल महमूद को कार्यकाल पूरा होने से सात महीने पहले ही पद से हटा दिया गया।
अल्पसंख्यकों को भरोसा
रहमान ने हिंदू-बौद्ध समेत चार अल्पसंख्यक मंत्रियों को कैबिनेट में शामिल कर सुरक्षा का आश्वासन दिया, जिससे भारत को सकारात्मक संदेश मिला।
क्रिकेट संबंध सुधारने की पहल
नए खेल मंत्री अमीनुल हक ने शाकिब अल हसन और मशरफे मुर्तजा जैसे खिलाड़ियों पर दर्ज मामलों को सुलझाने की इच्छा जताई और ढाका में भारतीय राजनयिकों से बातचीत की।
भारत से टकराव नहीं, संतुलन की नीति
सूत्रों के अनुसार रहमान दीर्घकालिक राजनीतिक पारी खेलना चाहते हैं और इसके लिए भारत से टकराव उचित नहीं मानते। देश के 30 से अधिक जिले भारतीय सीमा से लगे हैं और सीमावर्ती नागरिकों के लिए इलाज हेतु कोलकाता जाना अक्सर ढाका की तुलना में सस्ता पड़ता है। रहमान ने पाकिस्तान और चीन के प्रति संतुलित नीति की बात भी कही है तथा शेख हसीना के प्रत्यर्पण मुद्दे पर नरम रुख अपनाया है।
हालिया कदमों से संकेत मिलते हैं कि रहमान व्यावहारिक कूटनीति अपनाकर क्षेत्रीय संतुलन बनाना चाहते हैं। अब प्रमुख प्रश्न यही है—क्या बीएनपी के इन कदमों के बाद भारत को उनकी नीयत पर भरोसा करना चाहिए?






