पश्चिम बंगाल में विश्वविद्यालयों के प्रशासन से जुड़े बदलावों पर जारी विवाद के बीच राष्ट्रपति ने उन विधेयकों को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है, जिनके तहत मुख्यमंत्री को विश्वविद्यालयों का चांसलर बनाए जाने का प्रस्ताव था। इसके चलते मौजूदा व्यवस्था के अनुसार राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस ही विश्वविद्यालयों के चांसलर बने रहेंगे।
अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य विधानसभा से पारित तीन संशोधन विधेयकों को स्वीकृति नहीं दी है। इन विधेयकों में राज्य-सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों में चांसलर के पद पर राज्यपाल के स्थान पर मुख्यमंत्री को नियुक्त करने का प्रावधान था। अप्रैल 2024 में राज्यपाल ने इन विधेयकों को राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित किया था। ये विधेयक जून 2022 में पारित हुए थे। लोक भवन के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति की अस्वीकृति के बाद मौजूदा कानून ही लागू रहेगा, जिसके तहत राज्यपाल अपने पद के कारण विश्वविद्यालयों के चांसलर होते हैं। राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच प्रशासनिक अधिकारों को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी, जिसके चलते यह संशोधन लाया गया था। राज्य सरकार का तर्क था कि इससे निर्णय प्रक्रिया तेज होगी, लेकिन केंद्र स्तर पर समीक्षा के बाद विधेयकों को मंजूरी नहीं दी गई।






