सोने-चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ उछाल: सालभर कीमतें बढ़ने के बाद भी भाव शिखर पर

जानिए पिछले 12 महीनों में कैसे बढ़ीं सोने-चांदी की कीमतें और तेजी की वजह, वैश्विक गोल्ड रिजर्व और आगे का अनुमान

बीते एक साल में सोना और चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। हालिया आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारतीय सर्राफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं ने नए रिकॉर्ड बना दिए हैं। मौजूदा सप्ताह में ही चांदी के दामों में 15,000 रुपये प्रति किलोग्राम की जोरदार बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह एक ही दिन में करीब 6 प्रतिशत चढ़कर 2,65,000 रुपये प्रति किलोग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। वहीं 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना भी 2,900 रुपये (करीब 2.05 प्रतिशत) की तेजी के साथ 1,44,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर कारोबार करता दिखा। ऐसे में निवेशकों के मन में कई सवाल हैं, पिछले 12 महीनों में सोना-चांदी कितनी तेजी से बढ़े? इस उछाल के पीछे क्या कारण हैं? दुनिया में किस देश के पास सबसे ज्यादा सोना है? और आने वाले समय में कीमतों को लेकर क्या संकेत मिल रहे हैं? आइए विस्तार से समझते हैं।

जानिए 2025 में क्यों चढ़े सोना-चांदी के भाव:

  1. चांदी की औद्योगिक मांग में तेज इजाफा: 2025 में चांदी को केवल निवेश विकल्प ही नहीं, बल्कि ‘ग्रीन मेटल’ के रूप में नई पहचान मिली। अमेरिका द्वारा चांदी को ‘क्रिटिकल मिनरल’ की सूची में शामिल किए जाने और सोलर पैनल व ईवी बैटरी सेक्टर में मांग बढ़ने से वैश्विक बाजारों में इसकी उपलब्धता घट गई। लंदन और न्यूयॉर्क के वॉल्ट्स में चांदी की कमी ने कीमतों को और सहारा दिया।
  2. केंद्रीय बैंकों की रिकॉर्ड खरीदारी: चीन, रूस और ब्रिक्स देशों के केंद्रीय बैंकों ने डॉलर पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से 2025 में बड़े पैमाने पर सोना खरीदा। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, यह खरीदारी पिछले पांच दशकों में सबसे ऊंचे स्तर पर रही।
  3. ब्याज दरों की उम्मीद और भू-राजनीतिक तनाव: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं और मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण निवेशकों ने जोखिम वाले परिसंपत्तियों से दूरी बनाकर सोने जैसे सुरक्षित निवेश का रुख किया।

2026 में भी क्यों जारी है तेजी:

फेड को लेकर असमंजस की स्थिति: बाजार में यह धारणा मजबूत है कि 2026 में अमेरिकी फेड ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। दरों में कमी से बॉन्ड जैसे निवेश कम आकर्षक हो जाते हैं, जिससे सोना-चांदी की मांग बढ़ती है।

डॉलर पर दबाव और राजनीतिक हस्तक्षेप: अमेरिकी केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता को लेकर उठे सवालों और संभावित जांच की खबरों से डॉलर कमजोर पड़ा है। इसका सीधा फायदा कीमती धातुओं को मिला है।

सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, व्यापार युद्ध और महंगाई के डर के बीच निवेशक सोना-चांदी को सुरक्षित ठिकाना मान रहे हैं। खासकर चांदी में औद्योगिक मांग और सीमित आपूर्ति के चलते सोने से भी तेज उछाल देखने को मिला है।

किस देश के पास है सबसे ज्यादा सोना?
वैश्विक स्तर पर अमेरिका के पास सबसे बड़ा गोल्ड रिजर्व है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के पास मौजूद सोना, जर्मनी, इटली और फ्रांस—इन तीनों देशों के कुल भंडार के लगभग बराबर बताया जाता है।

सोने की कीमतों का क्या अनुमान

  • विशेषज्ञों और वैश्विक वित्तीय संस्थानों का मानना है कि निकट भविष्य में सोने के दामों में नरमी की संभावना कम है।
  • कई वॉल स्ट्रीट फर्मों के अनुसार 2026 के अंत तक सोना 5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है।
  • गोल्डमैन सैक्स के सर्वे में 36 प्रतिशत संस्थागत निवेशकों ने इस स्तर को पार करने की उम्मीद जताई है।
  • डॉयचे बैंक ने अल्पकालीन लक्ष्य 4,450 डॉलर प्रति औंस तय किया है, जबकि ऊपरी स्तर 4,950 डॉलर तक हो सकता है।
  • यूबीएस ने 2026 के मध्य तक 4,500 डॉलर प्रति औंस का अनुमान दिया है।
  • भारतीय बाजार (एमसीएक्स) में भी सोना पहले ही रिकॉर्ड स्तर छू चुका है और मौजूदा हालात को देखते हुए आगे तेजी की संभावना बनी हुई है।

चांदी के दामों को लेकर क्या संकेत

  • चांदी को लेकर बाजार का रुख और भी सकारात्मक नजर आ रहा है। जनवरी 2026 में यह 2,65,000 रुपये प्रति किलोग्राम के नए उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है।
  • मोतीलाल ओसवाल ने चांदी के 3.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक जाने की संभावना जताई है।
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर के 87 से 89 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने के अनुमान हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, 2025 में चांदी ने सोने से बेहतर प्रदर्शन किया था और यही रुझान 2026 में भी जारी रह सकता है। औद्योगिक मांग और सीमित आपूर्ति के चलते चांदी की कीमतों में मजबूती बनी रहने के संकेत मिल रहे हैं।

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