वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने गुरुवार को पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद पहली बार राष्ट्र को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने देश के तेल उद्योग को विदेशी निवेशकों के लिए खोलने की घोषणा की। रोड्रिगेज के बयान से यह संकेत भी मिला कि इस फैसले के पीछे अमेरिका का दबाव प्रभावी रहा है। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला में बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं। अपने पहले आधिकारिक संबोधन में डेल्सी रोड्रिगेज ने तेल क्षेत्र में नीति परिवर्तन का संकेत देते हुए विदेशी निवेश को आमंत्रित करने की बात कही। उनके भाषण में अमेरिकी दबाव की झलक साफ नजर आई।
तेल आय से विकास का रोडमैप
रोड्रिगेज ने कहा कि तेल उद्योग के लिए नई नीति तैयार की गई है और देश के राजनयिकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे विदेशी निवेशकों को इस नीति की जानकारी दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि तेल बिक्री से होने वाली आय को राष्ट्रीय बजट में शामिल कर विकास कार्यों में लगाया जाएगा। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया, जिनकी स्थिति ह्यूगो शावेज और मादुरो के कार्यकाल में कथित तौर पर कमजोर हुई थी। अपने 44 मिनट के भाषण में रोड्रिगेज ने अमेरिका द्वारा मादुरो की गिरफ्तारी की कड़ी आलोचना करते हुए इसे दोनों देशों के संबंधों पर दाग बताया। हालांकि, उन्होंने अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की वकालत भी की। उन्होंने कहा, “हमें कूटनीति से डरना नहीं चाहिए। अगर मैं वॉशिंगटन जाऊंगी तो सिर ऊंचा करके जाऊंगी।” संबोधन के दौरान मंच पर निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की तस्वीरें भी मौजूद थीं। माना जा रहा है कि रोड्रिगेज घरेलू समर्थकों को साधने के साथ-साथ अमेरिका को भी नाराज नहीं करना चाहतीं।
एक दिन पहले ही कार्यवाहक सरकार ने मादुरो शासन के दौरान गिरफ्तार किए गए कैदियों को रिहा किया। अमेरिका ने 3 जनवरी को ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ के तहत मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर अमेरिका ले गया। मादुरो फिलहाल अमेरिकी हिरासत में हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद डेल्सी रोड्रिगेज को वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त किया गया है।





