
कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के समर्थन से सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। 122 सदस्यीय नगर निगम में मनसे ने शिवसेना (शिंदे गुट) का साथ देकर सत्ता समीकरण को नया मोड़ दे दिया है। शिवसेना की 53 और मनसे की 5 सीटों के साथ गठबंधन बहुमत के बेहद करीब पहुंच गया है। महाराष्ट्र की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम के तहत, लंबे समय से विरोधी मानी जाने वाली राज ठाकरे की मनसे ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को समर्थन देने का ऐलान किया है। इस रणनीतिक फैसले ने न सिर्फ उद्धव ठाकरे गुट को झटका दिया है, बल्कि कल्याण-डोंबिवली में मेयर पद को लेकर भाजपा के साथ चल रही खींचतान में शिंदे गुट की स्थिति भी मजबूत कर दी है।
सीटों का गणित और बदले सियासी समीकरण
122 सीटों वाली कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में बहुमत का आंकड़ा 62 है। 15 जनवरी को हुए चुनाव में शिवसेना 53 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि भाजपा को 50 सीटें मिलीं। शिवसेना (उद्धव गुट) को 11, मनसे को 5, कांग्रेस को 2 और एनसीपी (एसपी) को 1 सीट मिली। मनसे नेता प्रमोद (राजू) पाटील ने अपने पांच नगरसेवकों की ओर से शिंदे गुट को समर्थन देने की औपचारिक घोषणा की। शिवसेना और मनसे के साथ आने से कुल संख्या 58 हो गई है। सूत्रों के अनुसार, उद्धव गुट के कुछ नगरसेवक भी शिंदे गुट के संपर्क में हैं, जिससे बहुमत का आंकड़ा पार होने की संभावना बढ़ गई है।
मनसे का आधिकारिक समर्थन
मनसे के पूर्व विधायक प्रमोद पाटील ने नवी मुंबई स्थित कोंकण संभागीय आयुक्त कार्यालय में अपने सभी पांच नगरसेवकों के साथ पहुंचकर शिवसेना को समर्थन देने का पंजीकरण कराया। वहीं, शिवसेना के 53 नगरसेवकों ने भी अपने गुट का पंजीकरण करवा दिया है।
मेयर पद पर बना सस्पेंस
केडीएमसी में भाजपा ने ढाई-ढाई साल के लिए मेयर पद की मांग रखी है। हालांकि, मनसे के समर्थन के बाद शिवसेना अब खुद को मजबूत स्थिति में मान रही है। कल्याण से सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि मनसे ने शहर के विकास को ध्यान में रखते हुए समर्थन दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिवसेना और भाजपा ने महायुति के तहत मिलकर चुनाव लड़ा था और नगर निगम में मेयर भी महायुति से ही बनेगा। मेयर पद को लेकर अंतिम निर्णय शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण संयुक्त रूप से करेंगे।






