
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। कारोबारी सत्र के अंत में रुपया 91.93 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ, जो अब तक की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।
मुद्रा बाजार में जारी भारी उथल-पुथल के बीच डॉलर की मजबूती और वैश्विक दबावों ने रुपये को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। लगातार बिकवाली के दबाव में भारतीय मुद्रा ने अपने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिससे आयातकों के साथ-साथ समग्र अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। ताजा सत्र में रुपये की ‘प्रोविजनल’ यानी अस्थायी क्लोजिंग 91.93 पर दर्ज की गई, जो यह दर्शाती है कि मुद्रा बाजार में दबाव कितना गहरा है। यह गिरावट भारतीय मुद्रा के इतिहास में एक अहम और चिंताजनक मोड़ के रूप में देखी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, 91.93 का स्तर मनोवैज्ञानिक और तकनीकी दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। रुपये की यह रिकॉर्ड गिरावट आयात लागत बढ़ाने के साथ-साथ महंगाई और चालू खाता घाटे पर भी सीधा असर डाल सकती है। ऐसे में यह स्तर नीति निर्धारकों और भारतीय रिजर्व बैंक के लिए चेतावनी संकेत माना जा रहा है। अब बाजार की नजर इस बात पर टिकी है कि रुपये में आगे और कमजोरी आती है या किसी तरह की स्थिरता देखने को मिलती है।






