बस्तर में लोकतंत्र की नई सुबह, दशकों बाद 47 गांवों में पहली बार फहरेगा तिरंगा

माओवादी उग्रवाद के लंबे साए में रहे बस्तर संभाग में अब लोकतंत्र की मजबूती और शांति की बहाली का उत्सव मनाया जाएगा। बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों के 47 ऐसे गांव, जहां वर्षों तक राष्ट्रीय पर्व मनाना संभव नहीं हो पाया था, वहां इस वर्ष 26 जनवरी को पहली बार गणतंत्र दिवस का आयोजन किया जाएगा। यह अवसर बस्तर के इतिहास में लोकतांत्रिक पुनर्जागरण का प्रतीक बनेगा। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में दशकों तक नक्सली हिंसा के कारण विकास और लोकतांत्रिक गतिविधियां बाधित रहीं, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। शांति, विश्वास और लोकतंत्र का उजाला इन इलाकों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। पहली बार इन 47 गांवों में तिरंगा फहराया जाना न केवल एक राष्ट्रीय पर्व का आयोजन होगा, बल्कि यह भयमुक्त वातावरण और लोकतांत्रिक व्यवस्था की पुनर्स्थापना का सशक्त संदेश भी देगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि जिन क्षेत्रों में कभी नक्सली हिंसा के कारण विकास ठप था, वहां अब सुशासन की सरकार विकास की मुख्यधारा पहुंचा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर को माओवाद के प्रभाव से मुक्त कर विश्वास और विकास के नए दौर की ओर अग्रसर कर रही है। 47 गांवों में पहली बार फहराने वाला तिरंगा शांति, लोकतंत्र और प्रगति की विजय का प्रतीक होगा।

दो वर्षों में तेजी से सुधरे हालात

पिछले दो वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित रणनीति, सुरक्षाबलों की निरंतर कार्रवाई और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से बस्तर संभाग में स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। नक्सल प्रभावित इलाकों में 59 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं, जिससे गांवों में सुरक्षा के साथ-साथ प्रशासन की प्रभावी मौजूदगी सुनिश्चित हुई है। इन प्रयासों का ही परिणाम है कि बीते वर्ष बस्तर के 53 गांवों में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास के साथ मनाया गया था। अब इस क्रम में 47 और गांव शामिल हो रहे हैं, जहां इस वर्ष पहली बार गणतंत्र दिवस का आयोजन होगा।

विशिखा मीडिया

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