छत्तीसगढ: धर्मांतरण के शक में ईसाईओं और हिंदूओं के बीच हिंसक झड़प में 13 लोग घायल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में धर्मांतरण के मुद्दे पर शुरू हुआ विवाद अचानक हिंसक झड़प में बदल गया। एक ओर प्रार्थना सभा में मौजूद ईसाई समुदाय के लोग थे, तो दूसरी ओर हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को हालात काबू करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
घटना सीपत इलाके की है, जहां रविवार को एक घर में आयोजित प्रार्थना सभा में बाइबल और धार्मिक साहित्य के वितरण के बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते पथराव, मारपीट और झड़प शुरू हो गई, जिसमें कम से कम 13 लोग घायल हो गए। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी गोपाल सतपथी ने बताया कि माता-चौरा चौक के पास आयोजित सभा में 150 से अधिक ईसाई समुदाय के लोग, जिनमें बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, मौजूद थे। सभा के दौरान बाइबल और धार्मिक साहित्य बांटे जा रहे थे। इस बीच कुछ लोगों को शक हुआ कि प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण हो रहा है। इसके बाद उन्होंने बजरंग दल और अन्य दक्षिणपंथी संगठनों को सूचना दी और पुलिस को भी खबर दी। कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और नारेबाजी करते हुए आयोजकों व पादरी से सभा खत्म करने की मांग करने लगे। तनाव बढ़ने पर स्थिति बिगड़ गई और एक समूह ने सभा स्थल पर पथराव शुरू कर दिया। जवाब में दूसरे पक्ष ने भी पत्थर फेंके, जिससे हिंसक झड़प छिड़ गई। पुलिस ने हस्तक्षेप कर किसी तरह दोनों पक्षों को शांत कराया। इस झगड़े में ईसाई समुदाय के 10 लोग और दक्षिणपंथी समूहों के 3 कार्यकर्ता घायल हुए। पुलिस ने ईसाई समुदाय के 7 लोगों को हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।
मामले में दोनों ओर से क्रॉस-एफआईआर दर्ज की गई है। पहली शिकायत में दक्षिणपंथी समूहों के 12 से अधिक सदस्यों पर दंगा करने, धमकी देने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने सहित गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया। वहीं दूसरी शिकायत में ईसाई समुदाय के 7 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 132 (लोक सेवक पर हमला), धारा 192 (दंगा भड़काने की नीयत से उकसाना), धारा 299 (धार्मिक भावनाओं का अपमान) और छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ है।

विशिखा मीडिया

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