
सेहत के लिए जरूरी है कि ‘जीरो शुगर’ के लेबल से प्रभावित होने के बजाय प्राकृतिक और संतुलित विकल्पों को प्राथमिकता दी जाए
आजकल बाजार में ‘जीरो शुगर’ और ‘डाइट’ ड्रिंक्स की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। जीरो कैलोरी और शुगर-फ्री टैग के कारण लोग इन्हें हेल्दी विकल्प मान लेते हैं, लेकिन विशेषज्ञों की राय इससे बिल्कुल अलग है। डॉक्टरों के अनुसार ये ड्रिंक्स दिमाग और शरीर को भ्रमित कर सकती हैं और लंबे समय में सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिनमें डायबिटीज से लेकर कैंसर तक का खतरा शामिल है। दरअसल, जीरो शुगर ड्रिंक्स में कैलोरी कम होती है, लेकिन इनमें आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का इस्तेमाल किया जाता है। ये तत्व वजन घटाने में मददगार लग सकते हैं, पर नियमित सेवन से मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। ये ड्रिंक्स धीरे-धीरे शरीर पर नकारात्मक असर डालती हैं।
आर्टिफिशियल स्वीटनर्स कैसे करते हैं नुकसान
इन ड्रिंक्स में चीनी की जगह एस्पार्टेम और सुक्रालोज जैसे आर्टिफिशियल स्वीटनर्स मिलाए जाते हैं, जो चीनी से कई गुना ज्यादा मीठे होते हैं। जब शरीर मिठास महसूस करता है, तो वह कैलोरी की उम्मीद करता है। कैलोरी न मिलने पर दिमाग और ज्यादा मीठा या हाई-कैलोरी फूड मांगने लगता है, जिससे ओवरईटिंग का खतरा बढ़ जाता है।
इंसुलिन और मेटाबॉलिज्म पर असर
हालांकि इनमें असली चीनी नहीं होती, लेकिन इनकी मिठास इंसुलिन रिस्पॉन्स को प्रभावित कर सकती है। कुछ अध्ययनों के अनुसार आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का नियमित सेवन मेटाबॉलिज्म को सुस्त कर सकता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर का जोखिम बढ़ जाता है।
हेल्थ पर नकारात्मक प्रभाव
पेट में मौजूद गुड बैक्टीरिया हमारे पाचन और इम्यून सिस्टम के लिए बेहद जरूरी होते हैं। जीरो शुगर ड्रिंक्स में मौजूद केमिकल्स इन बैक्टीरिया के संतुलन को बिगाड़ सकते हैं, जिसका असर पाचन, मूड और त्वचा तक पर पड़ता है।
कैंसर का संभावित खतरा
साल 2023 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी जारी की थी कि लंबे समय तक आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का सेवन करने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
हेल्दी विकल्प क्या अपनाएं?
- बिना चीनी या थोड़े शहद के साथ नींबू पानी
- नारियल पानी, जो प्राकृतिक और इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर होता है
- हर्बल टी या ब्लैक कॉफी
- खीरा, पुदीना या फलों के टुकड़ों से बना इन्फ्यूज्ड वाटर





