
मोन्स्टर की 2025 जॉब हगिंग रिपोर्ट इस ट्रेंड की पुष्टि करती है। रिपोर्ट के मुताबिक 75 प्रतिशत अमेरिकी कर्मचारी 2027 तक अपनी मौजूदा नौकरी में बने रहने की योजना बना रहे हैं।
अमेरिका में कार्यस्थल से जुड़ा रुझान तेजी से बदल रहा है। आर्थिक अनिश्चितता और सुस्त जॉब मार्केट के बीच अब कर्मचारी जोखिम लेने के बजाय अपनी मौजूदा नौकरी से जुड़े रहना ज्यादा सुरक्षित समझ रहे हैं। इसी बदलाव को ‘जॉब हगिंग’ ट्रेंड कहा जा रहा है, जो इन दिनों अमेरिका में तेजी से बढ़ रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, करीब 75 प्रतिशत अमेरिकी कर्मचारी नौकरी बदलने के बजाय वर्तमान पद पर टिके रहना पसंद कर रहे हैं। कमजोर भर्ती प्रक्रिया, खर्चों पर कंपनियों की सख्ती और संभावित छंटनी के डर ने कर्मचारियों को सतर्क बना दिया है। ऐसे माहौल में सुरक्षा और स्थिर आय को प्राथमिकता दी जा रही है।
क्या है ‘जॉब हगिंग’?
‘जॉब हगिंग’ का अर्थ है अपनी मौजूदा नौकरी को मजबूती से थामे रखना। इसमें कर्मचारी नई नौकरी खोजने या कंपनी बदलने की जगह वर्तमान भूमिका में ही बने रहना बेहतर मानते हैं। नौकरी की सुरक्षा, नियमित आय और छंटनी की आशंका इस ट्रेंड के प्रमुख कारण हैं। यह प्रवृत्ति बार-बार नौकरी बदलने के चलन के ठीक उलट मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी लेबर मार्केट में अब पहले जैसी तेजी नहीं रही। नई भर्तियां सीमित हैं और कंपनियां आर्थिक फैसलों को लेकर बेहद सतर्क हैं। फॉर्च्यून मैगज़ीन ने इस स्थिति को “जॉबलेस ग्रोथ” करार दिया है, जहां न तो बड़े पैमाने पर हायरिंग हो रही है और न ही व्यापक छंटनी। इसके अलावा, नौकरी बदलने पर पहले जैसा बड़ा वेतन लाभ भी नहीं मिल रहा, जिससे कर्मचारियों के लिए जोखिम लेना और कठिन हो गया है।
मोन्स्टर की 2025 जॉब हगिंग रिपोर्ट इस ट्रेंड की पुष्टि करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, 75 प्रतिशत अमेरिकी कर्मचारी 2027 तक अपनी मौजूदा नौकरी में बने रहने की योजना बना रहे हैं। वहीं 48 प्रतिशत कर्मचारियों का कहना है कि डर और आर्थिक अनिश्चितता के कारण वे नौकरी छोड़ने का फैसला नहीं ले पा रहे हैं। यह सर्वे 9 अक्टूबर 2025 को किया गया था, जिसमें 1,004 कामकाजी अमेरिकी कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। सर्वे में करियर संतुष्टि, नौकरी की सुरक्षा, जोखिम लेने की इच्छा और भविष्य की योजनाओं से जुड़े सवाल पूछे गए।
फायदे के साथ छिपे नुकसान
- करियर ग्रोथ पर असर: सिर्फ सुरक्षा के चलते एक ही जगह टिके रहने से नई स्किल्स सीखने और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां लेने के मौके कम हो सकते हैं, जिससे पेशेवर विकास धीमा पड़ता है।
- बर्नआउट का जोखिम: नौकरी बचाए रखने के दबाव में कई कर्मचारी जरूरत से ज्यादा काम करने लगते हैं, जिससे मानसिक तनाव और बर्नआउट की समस्या बढ़ सकती है।
- सैलरी में ठहराव: अक्सर नौकरी बदलने पर मिलने वाली वेतन वृद्धि, एक ही कंपनी में लंबे समय तक रहने से नहीं मिल पाती। जॉब हगिंग के कारण कर्मचारी कम वेतन पर भी समझौता कर लेते हैं।
- कंफर्ट जोन में फंसना: लंबे समय तक एक ही माहौल में रहने से बदलाव का डर बढ़ सकता है, जिससे नई परिस्थितियों में खुद को ढालने की क्षमता कमजोर हो जाती है।
क्या यह रुझान आगे भी बना रहेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक आर्थिक हालात पूरी तरह स्थिर नहीं होते और जॉब मार्केट में भरोसा वापस नहीं आता, तब तक जॉब हगिंग का ट्रेंड जारी रह सकता है। हालांकि कर्मचारियों के लिए यह जरूरी है कि वे नौकरी की सुरक्षा के साथ-साथ अपनी स्किल्स को निखारने और भविष्य के अवसरों के लिए भी तैयारी करते रहें।





