आज से महंगे हो जाएंगे सिगरेट और तंबाकू के उत्पाद, उत्पाद शुल्क के साथ लगेगा 40% जीएसटी

1 फरवरी से तंबाकू उत्पादों और पान मसाला पर नई जीएसटी दरें लागू होंगी, जिससे इनकी कीमतों में बढ़ोतरी तय है। नई व्यवस्था के तहत इन हानिकारक वस्तुओं पर 40 प्रतिशत जीएसटी के अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और उपकर लगाया जाएगा।

नई दिल्ली। 1 फरवरी से कुछ चुनिंदा उत्पादों पर संशोधित जीएसटी दरें प्रभावी होंगी, जिनका सीधा असर कीमतों पर पड़ेगा। ये नई दरें तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों पर लागू की जा रही हैं। हालांकि जीएसटी से संबंधित कई बदलाव 22 सितंबर 2025 से लागू हो चुके थे, लेकिन हानिकारक वस्तुओं पर नई कर व्यवस्था 1 फरवरी से प्रभाव में आएगी। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क तथा पान मसाला पर स्वास्थ्य उपकर 1 फरवरी से लागू किया जाएगा। यह कर जीएसटी की उच्चतम 40 प्रतिशत दर के ऊपर लगाया जाएगा। इससे पहले इन वस्तुओं पर 28 प्रतिशत जीएसटी और क्षतिपूर्ति उपकर लागू था, जो 1 जुलाई 2017 से प्रभावी था।

आज से महंगे होंगे ये उत्पाद
1 फरवरी से चबाने वाला तंबाकू, फिल्टर खैनी, जर्दा युक्त सुगंधित तंबाकू और गुटखा जैसे तंबाकू उत्पादों के लिए अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) आधारित मूल्यांकन प्रणाली लागू होगी। अब इन उत्पादों पर जीएसटी की गणना पैकेट पर अंकित खुदरा मूल्य के आधार पर की जाएगी। पान मसाला निर्माताओं को स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर कानून के तहत नया पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही उन्हें सभी पैकिंग मशीनों को कवर करने वाली कार्यशील सीसीटीवी प्रणाली लगानी होगी और उसकी रिकॉर्डिंग कम से कम 24 महीनों तक सुरक्षित रखनी होगी। निर्माताओं को उत्पाद शुल्क विभाग को मशीनों की संख्या और उनकी उत्पादन क्षमता की जानकारी भी देनी होगी। यदि कोई मशीन लगातार 15 दिन या उससे अधिक समय तक बंद रहती है, तो उत्पाद शुल्क में छूट का दावा किया जा सकेगा।

सिगरेट पर लंबाई के आधार पर शुल्क
संशोधित केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम के तहत 1 फरवरी से सिगरेट की लंबाई के अनुसार प्रति स्टिक 2.05 रुपये से लेकर 8.50 रुपये तक उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा।
वहीं, स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर कानून के अंतर्गत पान मसाला इकाइयों की उत्पादन क्षमता के आधार पर उपकर निर्धारित किया गया है। 40 प्रतिशत जीएसटी को शामिल करने के बाद भी पान मसाला पर कुल कर भार मौजूदा स्तर यानी लगभग 88 प्रतिशत पर ही रखा गया है।

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