तमिलनाडु के दीपम विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने कहा ‘नमाज हर दिन अदा नहीं कर सकते’

तमिलनाडु के कार्तिगई दीपम विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर हर दिन नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। शीर्ष अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें पहाड़ी पर पशु बलि और रोजाना नमाज पढ़ने पर रोक लगाई गई थी, और इसे एक संतुलित फैसला बताया है।
दरअसल, यह विवाद तमिलनाडु की पवित्र थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहाड़ी के नेल्लीथोप्पु इलाके में मुस्लिम समुदाय रमजान और बकरीद जैसे विशेष अवसरों पर नमाज अदा कर सकता है, लेकिन रोजाना वहां नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं होगी। नेल्लीथोप्पु क्षेत्र पर सिकंदर बादुशा औलिया दरगाह का स्वामित्व बताया जाता है। थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी की तलहटी में भगवान सुब्रमण्य स्वामी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। मान्यता है कि यह पहाड़ी भगवान सुब्रमण्य का निवास स्थान है, जिसके कारण सनातन धर्म को मानने वालों के लिए यह अत्यंत पवित्र मानी जाती है। पहाड़ी पर मंदिर और दरगाह, दोनों के मौजूद होने के कारण यहां नमाज और पशु बलि को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है।

हाईकोर्ट के आदेश को बताया संतुलित

  • बीते वर्ष अक्तूबर में मद्रास हाईकोर्ट ने नेल्लीथोप्पु इलाके में पशु बलि पर रोक लगाने का आदेश दिया था।
  • इस आदेश को चुनौती देते हुए दरगाह के एक इमाम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
  • याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वाराले की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और इसे संतुलित निर्णय करार दिया।
  • इससे पहले, दिसंबर में मद्रास हाईकोर्ट ने दरगाह के पास दीपाथून स्थल पर दीप प्रज्वलन की अनुमति दी थी, जिस पर विवाद खड़ा हो गया था।
  • राज्य सरकार ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताते हुए इस आदेश को लागू नहीं किया, जिसके बाद हाईकोर्ट ने सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की थी।
  • तमिलनाडु सरकार ने अवमानना आदेश के खिलाफ लेटर पेटेंट अपील दायर की, लेकिन डिवीजन बेंच ने उसे खारिज कर दिया।
  • इसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। इसी दौरान राज्य सरकार, पुलिस, दरगाह और तमिलनाडु वक्फ बोर्ड ने भी एकल जज के आदेश के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की थी।
  • अंततः 6 जनवरी को जस्टिस जी. जयचंद्रन और जस्टिस के.के. रामकृष्णन की डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के आदेश को बरकरार रखा।

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