मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कोठी भवन को वीर भारत संग्रहालय के रूप में परिवर्तित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद, भवन के नए सिरे से सुधार के लिए स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा तैयारियां शुरू की गई थीं।
उज्जैन: ग्वालियर स्टेट के समय निर्मित 139 वर्ष पुराना कोठी पैलेस (विक्रमादित्य भवन) अब एक नए रूप में दिखाई देगा। जर्जर हो चुके इस भवन में मरम्मत, रंगाई-पुताई, आकर्षक लाइटिंग के साथ-साथ इसकी पुरानी संरचना को पुनः संवारा जाएगा। इस कार्य के लिए 28 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके पुनर्निर्माण के बाद यहां वीर भारत संग्रहालय आकार लेगा। हाल ही में स्मार्ट सिटी ने कोठी भवन की प्राचीन संरचना को संरक्षित करने, नवीनीकरण करने और पुनः उपयोग के योग्य बनाने के लिए टेंडर जारी किए हैं। इसके तहत, जर्जर हो चुकी छत की मरम्मत, टूटे हुए हिस्सों की मरम्मत, तथा भवन के कमरों और हॉल को पुनः उसी स्वरूप में तैयार किया जाएगा। इसके अलावा, पूर्व में जोड़े गए कमरों को अलग किया जाएगा और नई फ्लोरिंग भी की जाएगी। यह कार्य 18 महीनों में पूरा किया जाएगा। स्मार्ट सिटी के इंजीनियरों का कहना है कि रिनोवेशन के बाद यह इमारत पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनेगी।
महान विभूतियों की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी
कोठी भवन में प्रदेश का पहला वीर भारत संग्रहालय स्थापित किया जाएगा। इस संग्रहालय की परिकल्पना के तहत, उन महान विभूतियों की प्रतिमाएं और उनके कार्यों का विवरण प्रदर्शित किया जाएगा, जिन्होंने भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इनमें संत, ऋषि, राजनेता, समाज सुधारक, राजा-महाराजा, वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री और वीर सैनिक भी शामिल होंगे। संग्रहालय में लगी मूर्तियां आकर्षक होंगी और संबंधित महापुरुषों के योगदान को डिजिटल प्रेजेंटेशन के माध्यम से दर्शाया जाएगा। साथ ही, पर्यटक मूर्तियों के साथ जीवंत फोटो भी खिंचवा सकेंगे। दीवारों पर म्यूरल्स, पेंटिंग और ऐतिहासिक गाथाओं को उकेरा जाएगा। इस संग्रहालय के माध्यम से युवाओं और देशवासियों को यह संदेश मिलेगा कि आज भारत जिस स्थान पर है, उसमें किन महान व्यक्तियों ने अपना सर्वस्व अर्पित किया है।
सिंहस्थ 2028 से पहले होगा तैयार
वीर भारत संग्रहालय को सिंहस्थ 2028 से पहले तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्य की जिम्मेदारी वीर भारत न्यास को सौंपी गई है। न्यास के श्रीराम तिवारी इस संग्रहालय को तैयार करने की योजना पर कार्य कर रहे हैं। सिंहस्थ से पहले संग्रहालय के निर्माण से देशभर से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक इसे देख सकेंगे।






