ब्राह्मण-दलित-पिछड़ों को लड़ा बीजेपी से हारी बाजी जीतना चाहता है विपक्ष

उत्तर प्रदेश की राजनीति में हिन्दुत्व की लहर ने योगी सरकार और भारतीय जनता पार्टी को ऐसी मजबूत नींव दे दी है कि विपक्षी दल अब हताशा के दौर से गुजर रहे हैं। प्रदेश में भाजपा समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी जैसे दलों के मुकाबले अभेद्य किले की तरह खड़ी नजर आ रही है। हिन्दुत्व के सहारे ही भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में फिर से सत्ता की कमान संभालना चाहती है। लेकिन विपक्षी नेताओं ने अब एक सोची-समझी चाल चली है। वे हिन्दू समाज को ही आपस में बांटने की साजिश रच रहे हैं। हर उस मुद्दे को हवा दी जा रही है जो हिन्दुओं के बीच फूट डाल सके। कभी ब्राह्मणवाद के नाम पर आक्रोश भड़काया जाता है तो कभी दलितों और पिछड़ों पर अत्याचार के रोने से सियासी माहौल गरमाया जाता है। अपराधियों को भी अब जाति के चश्मे से देखा जाने लगा है। यह सब कुछ हिन्दू एकता को चूर करने की गहरी चाल है।

प्रदेश की सियासत को करीब से देखें तो साफ पता चलता है कि भाजपा ने हिंदुत्व को ऐसा हथियार बनाया है जो विपक्ष के सारे तीरों को विफल कर देता है। राम मंदिर निर्माण से लेकर गौ रक्षा तक हर मुद्दे पर हिन्दू समाज एकजुट हो गया। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने कानून-व्यवस्था को पुख्ता कर अपराधियों पर नकेल कसी तो हिन्दू समाज में विश्वास जगा। लेकिन विपक्ष अब उसी समाज को तोड़ने पर तुला है। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के नेता ब्राह्मणों को भाजपा विरोधी बताने की मुहिम चला रहे हैं। वे कहते हैं कि भाजपा में ब्राह्मणों की उपेक्षा हो रही है। पुरानी घटनाओं को उछालकर ब्राह्मण युवकों को भड़काया जा रहा है। एक तरफ ब्राह्मण सम्मेलनों में नारे लगवाए जाते हैं तो दूसरी तरफ दलित सभाओं में ब्राह्मणों पर अत्याचार के किस्से गढ़े जाते हैं। यह दोहरी चाल हिन्दू समाज के दो बड़े वर्गों में वैमनस्य पैदा कर रही है।

दलित और पिछड़े वर्गों को भी निशाना बनाया जा रहा है। विपक्षी दल दावा करते हैं कि योगी सरकार में दलितों और पिछड़ों पर जुल्म हो रहे हैं। हर छोटी-मोटी घटना को जातिगत रंग देकर प्रचारित किया जाता है। उदाहरण के तौर पर कुछ महीने पहले एक घटना घटी जहां पुलिस ने अपराधी को पकड़ा। विपक्ष ने तुरंत चिल्लाना शुरू कर दिया कि वह दलित था और भाजपा सरकार ने उसे फंसाया। सच्चाई यह थी कि अपराधी ने कई हत्याएं की थीं लेकिन जाति का लबादा ओढ़ाकर उसे शहीद बनाने की कोशिश हुई। इसी तरह पिछड़े वर्ग के अपराधियों को भी संरक्षण देने की मुहिम चलाई गई। समाजवादी पार्टी के कुछ नेता खुले तौर पर कहते हैं कि अपराधी कोई भी हो, उसकी जाति को बचाना जरूरी है। इससे हिन्दू समाज में पिछड़ों और अन्य वर्गों के बीच खाई पैदा हो रही है।

कांग्रेस भी इस खेल में पीछे नहीं है। वह ब्राह्मण-दलित कार्ड खेल रही है। पार्टी के नेता पुरानी शिकायतें दोहराते हैं कि भाजपा सवर्णों की ही सरकार है। वे हिन्दू समाज को चार हिस्सों में बांटने की कोशिश कर रहे हैं। कभी जाट बनाम गुर्जर का मुद्दा उठता है तो कभी राजपूतों को ठाकुरों से लड़ाने की चेष्टा होती है। अपराध के मामलों को जाति से जोड़ना सबसे खतरनाक है। प्रदेश में अपराधी किसी भी जाति का हो सकता है लेकिन विपक्ष उसे जाति का चेहरा बना देता है। अगर अपराधी ब्राह्मण है तो ब्राह्मणवाद का ढोल पीटा जाता है। दलित अपराधी पर तो अत्याचार का रोना रोया जाता है। पिछड़ा अपराधी हो तो पिछड़ों की दुर्दशा का बखान किया जाता है। इससे समाज में नफरत का बीज बोया जा रहा है। हिन्दू समाज जो सदियों से एकजुट रहा, अब उसके टुकड़े करने की साजिश रची जा रही है।

यह साजिश नई नहीं है। विपक्ष हमेशा से जातिवाद का सहारा लेता रहा है। लेकिन अब यह हिंदुत्व के खिलाफ सीधी जंग है। भाजपा ने हिन्दू समाज को जाति से ऊपर उठाकर एक सूत्र में बांधा है। योगी सरकार की योजनाएं सबके लिए हैं। दलितों के लिए विशेष छात्रावास, पिछड़ों के लिए आरक्षण में इजाफा और ब्राह्मणों के लिए संस्कृत विद्यालय। लेकिन विपक्ष इन तथ्यों को नजरअंदाज कर अफवाहें फैला रहा है। हाल ही में एक जिले में दलित युवक की मौत पर विपक्ष ने ब्राह्मणों पर आरोप लगाए। जांच में साफ हुआ कि यह पारिवारिक झगड़ा था लेकिन सियासी फायदा उठाने के लिए जाति का जहर घोला गया। ऐसे कई उदाहरण हैं जहां अपराध को जातिगत संघर्ष का रूप दिया गया। लखनऊ से लेकर वाराणसी तक सभाओं में यही जहर परोसा जा रहा है।

विपक्ष की यह चाल उल्टी पड़ रही है। हिन्दू समाज जागरूक हो गया है। सोशल मीडिया पर लोग इन साजिशों को बेनकाब कर रहे हैं। भाजपा कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर एकता का संदेश दे रहे हैं। योगी आदित्यनाथ ने कई बार खुलकर कहा है कि हिन्दू एकता ही प्रदेश की ताकत है। विपक्ष की जातिवादी राजनीति अब जनता को भाती नहीं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी यही देखने को मिला। जहां विपक्ष ने जाति कार्ड खेला, वहां भाजपा ने हिन्दुत्व से जवाब दिया। अब 2027 के विधानसभा चुनाव में भी यही होगा। लेकिन विपक्ष हार मानने को तैयार नहीं। वे और तीव्रता से हिन्दुओं को बांटने की कोशिश करेंगे। अपराधियों को जाति का चोला पहनाकर सड़कों पर उतारेंगे। ब्राह्मणों को भड़काएंगे, दलितों को उकसाएंगे और पिछड़ों को भटकाएंगे।

यह साजिश सिर्फ सियासी नहीं, समाज को कमजोर करने वाली है। हिन्दू समाज अगर बंट गया तो प्रदेश की प्रगति रुक जाएगी। योगी सरकार ने बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है। एक्सप्रेसवे बने, हवाई अड्डे बढ़े, निवेश आया लेकिन एकता ही सबकी कुंजी है। विपक्ष को समझना चाहिए कि जनता अब जाति के जाल में नहीं फंसती। वे चाहे जितना चिल्लाएं, हिन्दुत्व की दीवार अटल है। ब्राह्मण, दलित, पिछड़ा, क्षत्रिय सब एक हैं। राम के भक्त एक हैं। विपक्ष की साजिशें नाकाम होंगी। प्रदेश फिर भाजपा के हाथों सशक्त होगा। हिन्दू समाज को सावधान रहना होगा। इन फूट डालने वाली चालों से बचना होगा। एकता बनाए रखें, तभी सच्ची विजय होगी।

संजय सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार, लखनऊ
(
ये लेखक के अपने स्वयं के निजी विचार हैं)

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