
संपत्ति रजिस्ट्रेशन से पहले खतौनी से नाम मिलान अनिवार्य
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 31 प्रस्तावों पर विचार किया गया, जिनमें से 30 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई, जबकि कुछ प्रस्तावों को फिलहाल स्थगित रखा गया। बैठक में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए अहम निर्णय लिया गया। अब किसी भी संपत्ति के पंजीकरण से पहले विक्रेता के नाम का खतौनी से मिलान करना अनिवार्य होगा। यदि नाम में किसी प्रकार का अंतर पाया जाता है तो रजिस्ट्रेशन विभाग इसकी जांच करेगा। बैठक में सर्किल रेट पर एक प्रतिशत शुल्क और विकास शुल्क के रूप में दो प्रतिशत अतिरिक्त स्टांप शुल्क से जुड़े प्रावधानों में भी संशोधन किया गया। पहले यह राशि उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी) जारी होने के बाद निकायों को दी जाती थी, लेकिन अब इसे छमाही आधार पर जारी किया जाएगा।
10 वर्ष का संचालन अनुबंध
ग्रामीण बस सेवा योजना में बसों की औसत आयु 15 वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि संचालन के लिए 10 वर्ष का अनुबंध किया जाएगा। योजना के तहत बसों को पहली बार परमिट, अनुबंध और टैक्स से छूट दी जाएगी। सरकार के अनुसार प्रदेश में करीब 5,000 ऐसे गांव हैं जहां अब तक कभी बस सेवा नहीं पहुंची। शुरुआत में प्रत्येक रूट पर दो बसों के संचालन की व्यवस्था की जाएगी। परिवहन विभाग से जुड़े प्रस्ताव के तहत सीएम ग्राम परिवहन योजना 2026 को स्वीकृति दी गई है। इस योजना के माध्यम से प्रदेश की 59,163 ग्राम सभाओं को बस सेवा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। जिन लगभग 12,200 गांवों में अब तक बस सेवा उपलब्ध नहीं थी, वहां 28 सीटर बसों का संचालन किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत बस सेवा को टैक्स से मुक्त रखा जाएगा और निजी क्षेत्र को भी संचालन की अनुमति दी जाएगी। इसके साथ ही मोटर व्हीकल कानून में संशोधन कर केंद्र सरकार के नियमों को लागू करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत ओला और ऊबर जैसे एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म को राज्य में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। ड्राइवरों के लिए फिटनेस जांच, मेडिकल टेस्ट और पुलिस सत्यापन भी जरूरी किया जाएगा। एग्रीगेटर कंपनियों के लिए आवेदन शुल्क 25 हजार रुपये और लाइसेंस फीस 5 लाख रुपये निर्धारित की गई है, जबकि लाइसेंस का नवीनीकरण हर पांच वर्ष में 5 हजार रुपये शुल्क के साथ होगा। राज्य सरकार एक स्वयं का परिवहन ऐप भी विकसित करेगी, जिसमें ड्राइवरों की पूरी जानकारी दर्ज होगी और उनकी ट्रेनिंग भी कराई जाएगी।
शहरी आवास की लागत सीमा बढ़ाई गई
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत अब 22 वर्गमीटर तक के मकान की लागत सीमा 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 9 लाख रुपये कर दी गई है। साथ ही अब 30 वर्गमीटर तक के मकान का निर्माण संभव होगा। इस योजना में लाभार्थियों को 1 लाख रुपये राज्य सरकार और 1.5 लाख रुपये केंद्र सरकार की ओर से सहायता दी जाएगी। सरकार ने कांशीराम आवास योजना के खाली पड़े मकानों की मरम्मत और रंगाई-पुताई कराकर उन्हें दलित परिवारों को आवंटित करने का भी निर्णय लिया है। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों की सेवा नियमावली में संशोधन करते हुए यह अनिवार्य किया गया है कि यदि कोई कर्मचारी छह माह के मूल वेतन से अधिक निवेश करता है तो उसकी जानकारी देनी होगी तथा प्रत्येक वर्ष अपनी अचल संपत्ति का विवरण भी देना होगा। कैबिनेट ने अयोध्या में खेल परिसर के लिए 2500 वर्गमीटर भूमि नगर निगम को हस्तांतरित करने, कई जिलों में समग्र शहरी योजना लागू करने, कानपुर ट्रांस गंगा सिटी के लिए चार लेन पुल निर्माण तथा बुंदेलखंड क्षेत्र में बांदा और झांसी के डेयरी संयंत्रों की क्षमता बढ़ाने से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी।
शिक्षकों को मिलेगी कैशलेस इलाज की सुविधा
राज्य सरकार ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति व्यवस्था में बदलाव करते हुए अशासकीय विद्यालयों के शिक्षकों को भी कैशलेस इलाज की सुविधा देने का निर्णय लिया है। इस योजना में कर्मचारियों को भी शामिल किया जाएगा, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को लाभ मिलेगा। योजना के तहत प्रति शिक्षक लगभग 2479 रुपये का प्रीमियम खर्च आएगा। इस नई व्यवस्था से प्रदेश के 1.28 लाख से अधिक शिक्षकों को सीधा लाभ मिलने का अनुमान है। इसके लिए राज्य सरकार पर लगभग 31.92 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। योजना के अंतर्गत निजी अस्पतालों को भी जोड़ा जाएगा, ताकि शिक्षकों और कर्मचारियों को उपचार के लिए अधिक विकल्प मिल सकें और समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें।






