
घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें काबू में रखने की कोशिश, 4 महीने निर्यात पर रहेगी रोक
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का प्रभाव अब वैश्विक बाजारों पर साफ नजर आने लगा है। कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है, जिससे ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। इसी बीच रूस ने 1 अप्रैल से पेट्रोल के निर्यात पर रोक लगाने का अहम निर्णय लिया है। हालांकि इस फैसले का वैश्विक बाजार पर असर पड़ सकता है, लेकिन भारत के लिए फिलहाल स्थिति संतुलित बताई जा रही है। रूस सरकार ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल 2026 से पेट्रोल के निर्यात पर अस्थायी रोक लागू की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और कीमतों को नियंत्रित रखना है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इस बीच रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक की अध्यक्षता में पेट्रोलियम बाजार की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि देश के पास पर्याप्त उत्पादन क्षमता और भंडार मौजूद है। बावजूद इसके, एहतियात के तौर पर निर्यात पर रोक लगाने का फैसला लिया गया है, ताकि घरेलू स्तर पर किसी तरह की कमी या मूल्य वृद्धि की स्थिति न बने।
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी निर्देश दिए हैं कि ईंधन की कीमतें निर्धारित सीमा से अधिक नहीं बढ़नी चाहिए। इसी दिशा में यह कदम उठाया गया है। ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, रिफाइनिंग प्रक्रिया स्थिर बनी हुई है और कंपनियों के पास पेट्रोल व डीजल का पर्याप्त भंडार है, जिससे घरेलू मांग को आसानी से पूरा किया जा सकता है।
भारत की स्थिति पर नजर डालें तो सरकार ने आश्वस्त किया है कि देश में तेल और गैस की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक कच्चे तेल, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और आने वाले दो महीनों के लिए आपूर्ति पहले से सुनिश्चित की जा चुकी है। साथ ही रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और घरेलू एलपीजी उत्पादन में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे आपूर्ति तंत्र मजबूत बना हुआ है।






