
आईपीएल प्रसारण पर लगा प्रतिबंध भी हटाया
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के 18 महीनों के कार्यकाल के दौरान भारत के साथ रिश्तों में आई खटास को लेकर आशंका जताई जा रही थी कि फरवरी में हुए आम चुनाव के नतीजों के बाद यह दूरी और बढ़ सकती है। इसकी मुख्य वजह पाकिस्तान के करीब मानी जाने वाली और भारत से दूरी बनाए रखने वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की जीत थी। हालांकि, इन आशंकाओं के विपरीत अब दोनों देशों के संबंधों में सुधार के संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने अपने हालिया कदमों से इस बदलाव का संकेत दिया है। उन्होंने जनसंहार दिवस पर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की और लंबे समय से चल रहे विवादों को खत्म करते हुए अपने देश में आईपीएल प्रसारण पर लगी रोक भी हटा दी। उनका यह रुख उनकी मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की नीतियों से अलग माना जा रहा है। तारिक रहमान के बयानों और फैसलों से यह साफ है कि बांग्लादेश अब भारत के साथ रिश्तों को फिर से मजबूत करना चाहता है। जनसंहार दिवस पर 1971 के घटनाक्रम को लेकर पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने अपनी ही पार्टी की पुरानी लाइन से अलग रुख अपनाया, जो राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। साथ ही उन्होंने नई पीढ़ी को स्वतंत्रता के महत्व से अवगत कराने पर भी जोर दिया।
गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के कार्यकाल में पाकिस्तान को प्राथमिकता देने की नीति अपनाई गई थी। 1991 से 1996 और 2001 से 2006 तक उनके शासन में भारत के साथ रिश्ते अपेक्षाकृत ठंडे रहे। वहीं अब बांग्लादेश भारत की सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए अपनी जमीन के दुरुपयोग को रोकने के प्रयास भी कर रहा है। हाल ही में बांग्लादेश की खुफिया एजेंसी और भारतीय अधिकारियों के बीच हुई बैठक इसी दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। इस बदलते परिदृश्य के बीच 7 अप्रैल को बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलील उर रहमान का भारत दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरे से पहले दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर तनाव कम हुआ है और वीजा सेवाएं भी बहाल कर दी गई हैं। पश्चिम एशिया संकट के दौरान भारत द्वारा बांग्लादेश को ऊर्जा संकट से उबारने में दी गई मदद ने भी रिश्तों को नई दिशा दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस दौरे के दौरान सीधी उड़ानों समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बन सकती है।
वास्तव में बांग्लादेश के लिए भारत से दूरी बनाए रखना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, आर्थिक और भौगोलिक संबंध गहरे हैं। अंतरिम सरकार के दौरान भारत विरोधी रुख की कीमत भी बांग्लादेश को कई स्तरों पर चुकानी पड़ी है। इसके अलावा गंगा जल संधि की अवधि भी इस साल दिसंबर में समाप्त होने जा रही है, जिसे लेकर नए सिरे से बातचीत जरूरी है। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि बांग्लादेश फिलहाल राजनीतिक मुद्दों से पहले अपने आर्थिक हितों को प्राथमिकता देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।






