कानपुर किडनी कांड: पांच लाख में खरीद, एक करोड़ तक में बिक्री

विदेशी महिला सहित अब तक 50 से अधिक मरीजों की किडनी बदली

कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े एक बड़े गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) कानपुर की उपाध्यक्ष, उनके पति और तीन अस्पताल संचालकों समेत कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया है कि गिरोह जरूरतमंद लोगों से पांच से दस लाख रुपये में किडनी खरीदकर उसे 60 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये तक में बेचता था। पुलिस के अनुसार, यह रैकेट सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार विदेशों तक जुड़े हुए हैं। पिछले दो वर्षों में गिरोह ने 50 से अधिक मरीजों के अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कराए, जिनमें एक विदेशी महिला भी शामिल है। हाल ही में 3 मार्च को दक्षिण अफ्रीका की एक महिला का ट्रांसप्लांट आहूजा हॉस्पिटल में किया गया था।

29 मार्च को हुए एक संदिग्ध ट्रांसप्लांट के बाद मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद पुलिस ने डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत, दलाल शिवम अग्रवाल और अन्य अस्पताल संचालकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस मामले में 15 लोगों के खिलाफ मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। जांच के दौरान पता चला कि गिरोह फर्जी दस्तावेजों और बीमारी के बहाने मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करता था, ताकि अवैध ट्रांसप्लांट को छिपाया जा सके। किडनी दान करने वाले युवक को गुमराह कर कम पैसे दिए जाते थे, जबकि मरीजों से मोटी रकम वसूली जाती थी। इस पूरे नेटवर्क में दलाल, डॉक्टर और अस्पताल संचालक शामिल थे, जो टेलीग्राम जैसे माध्यमों से संपर्क में रहते थे।

स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए एक अस्पताल को सील कर दिया है, जबकि अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं, पुलिस दिल्ली-एनसीआर सहित अन्य स्थानों पर फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है। आईएमए ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच समिति गठित की है। संस्था का कहना है कि तथ्यों की पुष्टि होने के बाद संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले में आरोपियों पर मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 की विभिन्न धाराओं और भारतीय न्याय संहिता के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। दोष सिद्ध होने पर आरोपियों को कठोर सजा और भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।

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