‘ट्रांसजेंडर अधिकार’ से संबंधित कानून में अहम बदलाव का रास्ता साफ

संशोधित बिल को मिली राष्ट्रपति की मंजूरी

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों से संबंधित कानून में अहम बदलाव का रास्ता साफ हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस विषय पर लाए गए संशोधित विधेयक को मंजूरी दे दी है। नए प्रावधानों के तहत ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ शारीरिक नुकसान पहुंचाने पर श्रेणीबद्ध सजा का प्रावधान शामिल किया गया है। हालांकि, संसद में इस बिल को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। विपक्षी दलों ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें समलैंगिक पुरुषों और महिलाओं को दायरे से बाहर रखा गया है, जो उचित नहीं है। सरकार का कहना है कि इस विधेयक का उद्देश्य ट्रांसजेंडर समुदाय को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना और उनके अधिकारों को मजबूत करना है। वहीं, विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह कानून आत्म-पहचान के अधिकार को सीमित करता है और व्यापक परामर्श के बिना लाया गया है। विपक्ष ने इसे स्थायी समिति के पास भेजने की मांग भी उठाई।

कानून में क्या बदलाव होंगे
संशोधित बिल में किसी व्यक्ति के ट्रांसजेंडर होने के निर्धारण के लिए एक अधिकृत निकाय गठित करने का प्रावधान किया गया है, जिसका भी विरोध किया गया है। कानून मंत्रालय की 30 मार्च की अधिसूचना के अनुसार, यह कानून केंद्र सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद निर्धारित तिथि से लागू होगा। विधेयक में ‘ट्रांसजेंडर’ शब्द की स्पष्ट परिभाषा तय करने पर जोर दिया गया है। साथ ही, इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि विभिन्न यौन अभिविन्यास और स्व-परिभाषित लैंगिक पहचानों को इसके दायरे में शामिल नहीं किया जाएगा। सरकार का तर्क है कि यह कानून विशेष रूप से उस वर्ग की सुरक्षा के लिए बनाया गया है, जो सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर लंबे समय से भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करता रहा है। वहीं, विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसका उद्देश्य सभी प्रकार की लैंगिक पहचान या लैंगिक तरलता वाले व्यक्तियों के प्रत्येक वर्ग को कवर करना नहीं है।

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