
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार ने घरेलू उद्योगों और उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। वित्त मंत्रालय ने प्रमुख पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात पर कस्टम ड्यूटी में अस्थायी छूट देने का निर्णय लिया है, जो 30 जून तक प्रभावी रहेगी। इस कदम का उद्देश्य आपूर्ति शृंखला में आ रही बाधाओं को कम करना और उद्योगों के लिए कच्चे माल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
पश्चिम एशिया संकट का असर
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसके चलते महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे भारत में कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरकों की आपूर्ति को लेकर चिंता गहराई है। युद्ध की स्थिति के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत तक उछाल दर्ज किया गया है, जिसका सीधा असर आयात-निर्भर देशों पर पड़ा है।
उद्योगों को मिलेगी रणनीतिक राहत
सरकार द्वारा दी गई कस्टम ड्यूटी छूट का उद्देश्य पेट्रोकेमिकल सेक्टर से जुड़े आवश्यक इनपुट्स की लागत को कम करना है। इससे डाउनस्ट्रीम उद्योगों पर लागत का दबाव घटेगा और उत्पादन प्रक्रिया सुचारू बनी रहेगी। जिन उत्पादों पर छूट दी गई है, उनमें मेथेनॉल, निर्जल अमोनिया, टोल्यूनि, स्टाइरीन, डाइक्लोरोमेथेन, विनाइल क्लोराइड मोनोमर और अनसैचुरेटेड पॉलिएस्टर रेजिन शामिल हैं।
इस फैसले से कई प्रमुख क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है—
- प्लास्टिक और पैकेजिंग उद्योग: कच्चे माल की लागत कम होने से उत्पादन सस्ता होगा।
- टेक्सटाइल सेक्टर: वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी।
- फार्मा और केमिकल इंडस्ट्री: सप्लाई चेन स्थिर रहने से उत्पादन प्रभावित नहीं होगा।
- ऑटो कंपोनेंट्स सेक्टर: निर्माण लागत में कमी से उद्योग को राहत मिलेगी।
ईंधन पर कर राहत से उपभोक्ताओं को फायदा
वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि लागत में कमी का लाभ अंततः आम उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को देखते हुए सरकार ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इसके बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये प्रति लीटर रह गई है, जबकि डीजल पर इसे शून्य कर दिया गया है। इसके साथ ही देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर 29.50 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क भी लगाया गया है। कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम मौजूदा वैश्विक संकट के बीच अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने और उद्योगों को सहारा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।




