
राज्य सरकारों से रोजाना सही जानकारी देने को कहा
एलपीजी की उपलब्धता को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच केंद्र सरकार ने राज्यों को अलर्ट किया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि फिलहाल केवल 17 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ही नियमित रूप से प्रेस ब्रीफिंग कर रहे हैं, जो मौजूदा स्थिति को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसी कारण सभी राज्यों को अपनी संचार प्रणाली को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय द्वारा जारी पत्र में पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने बताया कि कुछ क्षेत्रों में अब भी भ्रामक सूचनाएं और अफवाहें फैल रही हैं, जिससे लोगों में अनावश्यक भय का माहौल बन रहा है। इसके परिणामस्वरूप कई जगहों पर घबराहट में खरीदारी (पैनिक बायिंग) की स्थिति भी देखने को मिल रही है। केंद्र ने राज्यों से अपील की है कि वे सूचना के प्रसार को सशक्त बनाकर स्थिति को सामान्य बनाए रखें। वर्तमान में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, नागालैंड, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत 17 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश समय-समय पर प्रेस ब्रीफिंग कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने अन्य राज्यों से भी तत्काल इसी तरह की पहल करने को कहा है।
मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर प्रतिदिन प्रेस ब्रीफिंग आयोजित की जाए और सोशल व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से सही व समय पर जानकारी जनता तक पहुंचाई जाए। इससे लोगों में एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता और निर्बाध आपूर्ति को लेकर विश्वास कायम रहेगा और अफवाहों पर अंकुश लगाया जा सकेगा। इसके साथ ही केंद्र ने जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि ऐसी अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए लगातार निगरानी और आवश्यक कदम उठाए जाएं। यह निर्देश 27 मार्च को जारी उस चेतावनी के बाद आया है, जिसमें पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते वैश्विक सप्लाई चेन पर असर की आशंका जताई गई थी। इन हालात के बीच पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों व उपलब्धता को लेकर सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें तेजी से फैल रही हैं, जिससे घरेलू आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है।






