जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) विधेयक, 2026 संसद में पारित

79 कानूनों में बड़े बदलाव, छोटे अपराधों पर राहत

संसद ने जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) विधेयक, 2026 को पारित कर 79 कानूनों के 1,000 से अधिक प्रावधानों में व्यापक संशोधन किए हैं। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इसे अब तक का सबसे बड़ा और अभूतपूर्व सुधार बताया है। उनके अनुसार, इस स्तर का बदलाव न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर भी दुर्लभ है। इस संशोधन में स्वतंत्रता-पूर्व के छह कानून भी शामिल किए गए हैं। संसद से पारित इस विधेयक का उद्देश्य विभिन्न कानूनों में मौजूद जटिल और दंडात्मक प्रावधानों को सरल और तर्कसंगत बनाना है। इससे कारोबार करना आसान होगा और आम नागरिकों को भी राहत मिलेगी। यह विधेयक पहले पेश किए गए जन विश्वास विधेयक, 2025 का विस्तारित संस्करण है, जिसका दायरा सेलेक्ट कमेटी की सिफारिशों के बाद काफी बढ़ाया गया।

छोटे अपराधों पर जेल नहीं, अब जुर्माना
इस कानून की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मामूली और तकनीकी उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से हटाकर प्रशासनिक उल्लंघन माना जाएगा। अब ऐसे मामलों में जेल की सजा के बजाय जुर्माना लगाया जाएगा। सरकार पहले ही 183 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर चुकी है। नए प्रावधानों के तहत चेतावनी, सुधार नोटिस और आर्थिक दंड जैसे विकल्प लागू होंगे, जिससे अदालतों पर लंबित मामलों का बोझ भी कम होगा। विधेयक के तहत सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाना, मेट्रो में धूम्रपान या ट्रैफिक संकेतों को नुकसान पहुंचाने जैसे मामलों में अब एफआईआर के बजाय जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, ड्रग्स और कॉस्मेटिक कानून के कुछ उल्लंघनों पर जेल की सजा हटाकर एक लाख रुपये तक का जुर्माना तय किया गया है। परिवहन नियमों में भी बदलाव करते हुए बिना बीमा वाहन चलाने जैसे मामलों में कई स्थितियों में जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

भरोसे पर आधारित शासन की ओर कदम
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य दंडात्मक व्यवस्था से हटकर भरोसे पर आधारित शासन प्रणाली को बढ़ावा देना है। इससे ईमानदार नागरिकों और कारोबारियों को अनावश्यक कानूनी दबाव से मुक्ति मिलेगी और व्यापारिक वातावरण बेहतर होगा। विधेयक में चरणबद्ध कार्रवाई का प्रावधान किया गया है—पहले सलाह, फिर चेतावनी और बार-बार उल्लंघन पर बढ़ता जुर्माना। हालांकि, गंभीर अपराधों पर पहले जैसी सख्ती जारी रहेगी। जुर्माने की राशि को संशोधित कर हर तीन साल में 10 प्रतिशत बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। विवादों के समाधान के लिए निर्णायक और अपीलीय प्राधिकरण गठित किए जाएंगे। कुछ मामूली अपराधों, जैसे झूठा फायर अलार्म या जन्म-मृत्यु की सूचना न देना, को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि यह कानून ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में सहायक होगा।

श्रम कानूनों में भी राहत
एप्रेंटिस एक्ट, 1961 के तहत पहली या दूसरी बार उल्लंघन करने पर अब सख्त कार्रवाई की बजाय चेतावनी या सलाह दी जाएगी। इससे उद्योगों को अनुपालन में राहत मिलेगी। उद्योग संगठन सीआईआई ने इस विधेयक का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे अनुपालन का बोझ घटेगा और कारोबार करना आसान होगा। संगठन के अनुसार, विवाद निपटान प्रक्रिया में तेजी आएगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा, जिससे देश में निवेश का माहौल बेहतर होगा।

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