क्या फिर जरूरी होगा टीकाकरण…?

कोविड-19 एक बार फिर नए रूप में सामने आता दिख रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोरोना का नया वैरिएंट BA.3.2, जिसे वैज्ञानिकों ने ‘सिकाडा’ नाम दिया है, तेजी से फैलते हुए यूके सहित 23 देशों तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वेरिएंट आने वाले समय में यूके में सबसे प्रमुख स्ट्रेन बन सकता है। इसी के चलते प्री-स्कूल टीकाकरण कार्यक्रमों में कोविड वैक्सीन को शामिल करने की मांग भी उठने लगी है साल 2020 से 2023 के बीच वैश्विक स्तर पर भारी प्रभाव डालने वाला कोरोना वायरस अब एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है। शुरुआती अध्ययनों में संकेत मिले हैं कि यह नया वैरिएंट तेजी से फैलने के साथ-साथ उन लोगों को भी संक्रमित कर सकता है, जो पहले संक्रमण या वैक्सीन के जरिए इम्युनिटी हासिल कर चुके हैं। हालांकि, अभी तक संक्रमितों की सटीक संख्या स्पष्ट नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ इसे लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।
इम्युनिटी को चकमा देने की क्षमता
इस नए वैरिएंट में मौजूद म्यूटेशन इसे मौजूदा वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा से बच निकलने में सक्षम बना सकते हैं। फिलहाल इसके लक्षण पुराने कोरोना वायरस जैसे ही हैं, जैसे बुखार, थकान, बदन दर्द और गले में खराश। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह बच्चों, खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है। विशेषज्ञों ने बच्चों में इस वैरिएंट के संभावित खतरे को लेकर चेतावनी दी है। लीड्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर स्टीफन ग्रिफिन के अनुसार, पहले बच्चों के लिए वैक्सीन को वैकल्पिक रखने का फैसला दूरदर्शिता की कमी दर्शाता है। उनका कहना है कि पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए बच्चों के टीकाकरण पर अब ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। हालांकि, फिलहाल यह वैरिएंट तेजी से फैलने वाली महामारी की लहर जैसा प्रतीत नहीं हो रहा, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ रहा है। लेकिन संक्रमण बढ़ने के साथ वायरस में नए म्यूटेशन की संभावना भी बढ़ जाती है, जो आगे चलकर गंभीर स्थिति पैदा कर सकते हैं।

75 म्यूटेशन वाला नया खतरा
प्रारंभिक विश्लेषण में सामने आया है कि इस वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में करीब 75 म्यूटेशन हो चुके हैं, जिससे यह इम्यून सिस्टम के लिए नई चुनौती बन गया है। ईस्ट एंग्लिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पॉल हंटर के अनुसार, इसका यह मतलब नहीं है कि इससे गंभीर बीमारी या मृत्यु दर में स्वतः वृद्धि होगी। मुख्य सवाल यह है कि यह वैरिएंट सार्वजनिक स्वास्थ्य पर कितना असर डालता है।
क्या फिर जरूरी होगा वैक्सीनेशन
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में वैक्सीनेशन की रफ्तार कम हो रही है, जो चिंता का विषय है। कोविड वैक्सीन ने गंभीर मामलों को कम करने में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता समय के साथ घटती है। ऐसे में जोखिम समूहों खासतौर पर बच्चों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को दोबारा वैक्सीन लेने की सलाह दी जा रही है।
अस्वीकरण: किसी भी बीमारी या टीकाकरण से संबंधित निर्णय लेने से पहले चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।






