
पेट्रोल की कीमत 458.40 और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 520.35 प्रति लीटर तक पहुंची
पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया भारी वृद्धि ने देशभर में ट्रांसपोर्ट सेक्टर को बुरी तरह प्रभावित किया है। ईंधन महंगा होने के बाद यात्री किराए और माल भाड़ा दरों में 20 से 65 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आम जनता और उद्योग दोनों पर दबाव बढ़ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक महीने के भीतर ईंधन दरों में दो बार संशोधन किया गया है। अप्रैल में पेट्रोल की कीमत में करीब 137 रुपये प्रति लीटर और डीजल में लगभग 184 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई, जिसके बाद पेट्रोल 458.40 रुपये और हाई-स्पीड डीजल 520.35 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है।
खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है। यहां ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण किराए बढ़ाना मजबूरी हो गया है। पेशावर में हुई एक बैठक में अंतर-जिला और अंतर-प्रांतीय रूट्स के किराए में अतिरिक्त 25 प्रतिशत बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई। वहीं, पंजाब में यात्री किराए पहले ही 65 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। माल ढुलाई क्षेत्र भी इस संकट से अछूता नहीं है। पाकिस्तान गुड्स ट्रांसपोर्टर्स ओनर्स एसोसिएशन ने फ्रेट चार्ज में 65 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का ऐलान किया है, जिससे बाजार में वस्तुओं के दाम और बढ़ने की आशंका है।
ट्रांसपोर्टर्स ने केंद्र सरकार पर बिना परामर्श के अचानक फैसले लेने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इससे ऑपरेटर्स और यात्रियों के बीच विवाद की स्थिति बनती है। वहीं, इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। अवामी नेशनल पार्टी के नेता ऐमल वली खान ने इसे जनविरोधी कदम बताते हुए सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। सरहद चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने भी चेतावनी दी है कि ईंधन की बढ़ती कीमतें औद्योगिक गतिविधियों को प्रभावित करेंगी और महंगाई को और बढ़ाएंगी। मजदूर संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के चलते गरीब और निम्न मध्यम वर्ग के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना लगातार कठिन होता जा रहा है।






