एअर इंडिया के सीईओ का इस्तीफा, कार्यकाल पूरा होने से पहले ही छोड़ा पद

जानिए मैनेजमेंट ट्रेनी से सीईओ तक का सफर और इस्तीफे की वजह

क्या एअर इंडिया में हुआ यह अचानक नेतृत्व परिवर्तन किसी बड़े बदलाव की आहट है? आखिर कौन हैं कैंपबेल विल्सन और उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद छोड़ने का निर्णय क्यों लिया? देश की प्रमुख विमानन कंपनी एअर इंडिया में शीर्ष स्तर पर बड़ा बदलाव सामने आया है। मौजूदा सीईओ कैंपबेल विल्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि कंपनी ने उनसे आग्रह किया है कि नए सीईओ की नियुक्ति तक वे अपनी जिम्मेदारियां संभालते रहें, ताकि संक्रमण प्रक्रिया सुचारु बनी रहे। जानकारी के अनुसार उनका कार्यकाल सितंबर 2027 तक था, लेकिन उन्होंने पहले ही संकेत दे दिए थे कि वे इसे आगे नहीं बढ़ाना चाहते। इसी के मद्देनज़र कंपनी ने जनवरी 2026 से नए सीईओ की तलाश शुरू कर दी थी।

कैंपबेल विल्सन एविएशन इंडस्ट्री का एक प्रतिष्ठित नाम हैं। उन्होंने 1996 में सिंगापुर एयरलाइंस के साथ मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। न्यूजीलैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ कैंटरबरी से मास्टर ऑफ कॉमर्स (फर्स्ट क्लास ऑनर्स) की डिग्री हासिल करने वाले विल्सन ने कनाडा, हांगकांग और जापान जैसे देशों में कार्य किया है। वे लो-कॉस्ट एयरलाइन स्कूट के संस्थापक सीईओ भी रह चुके हैं और 2011 से 2016 तक इसका नेतृत्व किया। वर्ष 2020 में वे दोबारा स्कूट के सीईओ बने और 2022 में एअर इंडिया की कमान संभाली। फिलहाल एअर इंडिया में नए सीईओ की तलाश अंतिम चरण में है। इस दौड़ में अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र के कई अनुभवी नाम शामिल बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, अगले सप्ताह होने वाली अहम बैठक में नए सीईओ के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है, हालांकि कंपनी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

एअर इंडिया के सामने चुनौतियां
वर्तमान समय में एअर इंडिया कई चुनौतियों से जूझ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में कंपनी को करीब 20,000 करोड़ रुपये तक के नुकसान की आशंका है। इसकी प्रमुख वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है, जिसके चलते एयरस्पेस प्रतिबंध लागू हो रहे हैं। परिणामस्वरूप उड़ानों के रूट में बदलाव और ईंधन खर्च में वृद्धि हुई है, जिसका असर खासतौर पर लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ा है। इसके अलावा, नए विमानों की डिलीवरी में देरी और ऑपरेशनल लागत में बढ़ोतरी भी कंपनी की स्थिति को प्रभावित कर रही है। पिछले वर्ष अहमदाबाद से लंदन जा रही फ्लाइट AI-171 टेकऑफ के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसमें 260 लोगों की जान चली गई थी। इस घटना का प्रभाव अब भी कंपनी की छवि और संचालन पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट, जो जून 2026 तक आने की उम्मीद है, नए सीईओ की नियुक्ति पर भी असर डाल सकती है।

एअर इंडिया से पहले इंडिगो में भी बड़ा नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिला था। कंपनी के सीईओ पीटर एल्बर्स ने 10 मार्च को इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद विली वॉल्श को नया सीईओ नियुक्त किया गया। इंडिगो भी हाल के समय में परिचालन संकट और वित्तीय दबाव का सामना कर रही थी।

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