
अदालत ने कहा- सभी पक्ष समय-सीमा का ध्यान रखें
सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला समीक्षा मामले में आज से सुनवाई की शुरुआत कर दी है। नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ महिलाओं के मंदिर प्रवेश, धार्मिक आस्थाओं और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों पर विचार कर रही है। मंगलवार को शुरू हुई इस सुनवाई में केरल के सबरीमाला मंदिर सहित विभिन्न धर्मों और धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव से संबंधित याचिकाओं पर चर्चा हो रही है। अदालत ने 2018 के फैसले के खिलाफ दायर समीक्षा याचिकाओं की सुनवाई के लिए औपचारिक रूप से संविधान पीठ का गठन किया है।
समय सीमा का पालन करें
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय पीठ ने सभी पक्षों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे तय समयसीमा का कड़ाई से पालन करें। अदालत ने कहा कि कई अन्य महत्वपूर्ण मामले लंबित हैं, इसलिए किसी भी पक्ष को अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। पीठ ने वकीलों से अपने तर्क और दस्तावेज निर्धारित समय में ही प्रस्तुत करने को कहा, जिससे यह संकेत मिलता है कि अदालत इस मामले में शीघ्र निर्णय देने के पक्ष में है। इस पीठ की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत कर रहे हैं, जबकि अन्य न्यायाधीशों में बी.वी. नागरथना, एम.एम. सुंदरश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ए.जी. मसिह, प्रसन्न बी. वराले, आर. महादेवन और जोयमलया बागची शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि 2018 के फैसले में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी। सबरीमाला मामले के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता की व्यापक व्याख्या से जुड़े अन्य अहम मुद्दों पर भी विचार करेगा। इनमें मस्जिदों और दरगाहों में मुस्लिम महिलाओं के प्रवेश का अधिकार, अंतरधार्मिक विवाह के बाद पारसी महिलाओं का अग्नि मंदिरों में प्रवेश, सामाजिक बहिष्कार की प्रथाओं की वैधता और दाऊदी बोहरा समुदाय में महिला जननांग विकृति से जुड़े कानूनी प्रश्न शामिल हैं।

सुनवाई का तय कार्यक्रम
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने सुनवाई के लिए विस्तृत कार्यक्रम भी तय किया है। अदालत के अनुसार, मामले की स्वीकार्यता पहले ही तय हो चुकी है और सात प्रमुख कानूनी सवालों की पहचान की गई है। कार्यक्रम के तहत 7 से 9 अप्रैल तक समीक्षा याचिकाओं के समर्थन में दलीलें सुनी जाएंगी, जबकि 14 से 16 अप्रैल के बीच विरोधी पक्ष अपने तर्क रखेंगे। जवाबी दलीलों की सुनवाई 21 अप्रैल को होगी और 22 अप्रैल तक एमिकस क्यूरी अपनी अंतिम दलीलें प्रस्तुत करेंगे। कोर्ट ने सभी पक्षों को पहले से लिखित दलीलें दाखिल करने और समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई से पहले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने अपने लिखित पक्ष में सुप्रीम कोर्ट से धर्म की समुदाय-आधारित समझ अपनाने की अपील की है। बोर्ड का कहना है कि अदालत को आस्था से जुड़ी परंपराओं की पुनर्व्याख्या करने से बचना चाहिए और ‘आवश्यक धार्मिक प्रथा’ के सिद्धांत के उपयोग पर पुनर्विचार करना चाहिए। वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार इन समीक्षा याचिकाओं का समर्थन कर रही है।



