
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का 94 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से उम्र से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित थीं, उनका अंतिम संस्कार आज शाम लगभग 5 बजे दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित कब्रिस्तान में किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाली मोहसिना किदवई भारतीय राजनीति की एक अनुभवी और प्रभावशाली हस्ती थीं। उन्होंने राजीव गांधी सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे अहम मंत्रालयों का नेतृत्व किया। अपने लंबे राजनीतिक करियर में वे लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की सदस्य भी रहीं। 1 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में जन्मीं किदवई ने अपना जीवन जनसेवा और राजनीति को समर्पित किया। उनकी प्रारंभिक शिक्षा अलीगढ़ के विमेंस कॉलेज में हुई। वर्ष 1953 में उनका विवाह खलीलुर रहमान किदवई से हुआ। उनका राजनीतिक सफर उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ, जहां वे 1960 से 1974 तक विधान परिषद की सदस्य रहीं। इसके बाद 1974 से 1977 तक वे विधानसभा की सदस्य बनीं। राज्य सरकार में उन्होंने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री, हरिजन एवं समाज कल्याण मंत्री तथा लघु उद्योग मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। राष्ट्रीय स्तर पर भी मोहसिना किदवई का योगदान उल्लेखनीय रहा। वे छठी और सातवीं लोकसभा की सदस्य रहीं। केंद्र सरकार में उन्होंने श्रम एवं पुनर्वास, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। बाद में उन्हें ग्रामीण विकास मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार दिया गया। 31 दिसंबर 1984 से उन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री (कैबिनेट) के रूप में जिम्मेदारी संभाली। वे कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेताओं में शामिल थीं और संगठन में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे 1976 से 1980 तक उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष रहीं और 1982 में पुनः इस पद पर नियुक्त हुईं। इसके साथ ही वे कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) और सेंट्रल इलेक्शन कमेटी की सदस्य भी रहीं।
सामाजिक क्षेत्र में भी दिया महत्वपूर्ण योगदान
राजनीति के साथ-साथ उन्होंने समाज सेवा में भी सक्रिय भूमिका निभाई। विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण के लिए उन्होंने कई सराहनीय पहल कीं। बाराबंकी में नेशनल गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल, वयस्क महिलाओं की साक्षरता केंद्र, सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण संस्थान और “बाल जगत” जैसे संस्थानों से वे जुड़ी रहीं। उनका विशेष ध्यान समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान पर रहा। मोहसिना किदवई ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, जर्मनी, केन्या, मॉरीशस, हंगरी और यूएई सहित कई देशों का दौरा किया और वैश्विक स्तर पर भारत की भागीदारी को मजबूती से प्रस्तुत किया। उन्हें साहित्य, जीवनी, संगीत और खेलों में रुचि थी, जिसमें बैडमिंटन उनका पसंदीदा खेल था। मोहसिना किदवई का निधन भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण युग का अंत माना जा रहा है। उनके योगदान और विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे। उनके निधन से राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर है।





