
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल दो सप्ताह के लिए स्थगित करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इस अवधि के दौरान किसी भी तरह के हमले या बमबारी पर रोक रहेगी। राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक यह सीजफायर दोनों पक्षों पर समान रूप से लागू होगा। यानी इस दौरान न तो अमेरिका कोई हमला करेगा और न ही ईरान की ओर से कोई आक्रामक कदम उठाया जाएगा। हालांकि, इस अस्थायी समझौते के लिए अमेरिका ने एक अहम शर्त रखी है—ईरान को तुरंत, पूरी सुरक्षा के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों की आवाजाही के लिए खोलना होगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका अपने कई रणनीतिक लक्ष्य पहले ही हासिल कर चुका है और अब ईरान के साथ स्थायी शांति समझौते की दिशा में तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ईरान की ओर से 10 सूत्रीय प्रस्ताव प्राप्त हुआ है, जिसे बातचीत के आधार के रूप में लिया जा रहा है। ट्रंप का दावा है कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे कई विवादित मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और आने वाले दो हफ्तों में समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश की जाएगी। उनके अनुसार, यदि सब कुछ योजना के अनुरूप रहा, तो यह पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ा टकराव
इस पूरे विवाद की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले से हुई थी, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया और इस्राइल पर भी मिसाइल हमले किए। इस संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हुई। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि ईरान जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोलता और समझौते की दिशा में आगे नहीं बढ़ता, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि ऐसी स्थिति में ईरान के ऊर्जा संयंत्रों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। गौरतलब है कि ट्रंप इससे पहले भी ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दे चुके थे, जिसे बाद में कई बार बढ़ाया गया और अंततः 8 अप्रैल तक की समय-सीमा तय की गई। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि समझौते की संभावना अभी भी बनी हुई है, लेकिन यदि वार्ता विफल होती है तो अमेरिका कड़ा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की आम जनता अपनी सरकार से संतुष्ट नहीं है और वे अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन कर सकते हैं।






