आज के दिन देश ने 2001 में संसद पर हुए आतंकवादी हमले के बलिदानों को याद किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने संसद की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि “मैं उन बहादुरों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में अपने जीवन का बलिदान दिया। उनका साहस और निस्वार्थ सेवा हमारे लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि “हम आतंकवाद के खिलाफ अपने संकल्प को दोहराते हैं और राष्ट्र उन शहीदों और उनके परिवारों के प्रति सदैव कृतज्ञ रहेगा।”
इस अवसर पर संसद भवन परिसर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और अन्य सांसदों तथा मंत्रियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। सीआईएसएफ के जवानों ने सलामी दी और एक मिनट का मौन रखा गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य प्रमुख नेता भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
13 दिसंबर 2001 को संसद पर आतंकवादी हमला हुआ था, जिसमें पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने इसे अंजाम दिया था। इस हमले में नौ लोग शहीद हुए थे, जबकि सुरक्षा बलों ने सभी पांच आतंकवादियों को मार गिराया था। इस घटना ने देश को गहराई से झकझोर दिया था। सुरक्षा कर्मियों की सतर्कता और बहादुरी के कारण आतंकवादी संसद भवन में प्रवेश करने में नाकाम रहे।
हमले के दौरान आतंकियों की कार से बड़ी मात्रा में आरडीएक्स बरामद हुआ था। उस समय संसद में करीब 200 सांसद और मंत्री मौजूद थे, लेकिन सभी सुरक्षित रहे। इस घटना के बाद मुख्य आरोपी अफजल गुरु को 2013 में फांसी दी गई, जबकि अन्य आरोपियों को विभिन्न सजा दी गई।
संसद पर हुए इस कायराना हमले ने देश की एकता और सुरक्षा को लेकर जनता और सुरक्षा बलों के दृढ़ निश्चय को और मजबूत किया।
संसद पर हमले के 23 साल: राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित अन्य नेताओं ने आतंकी हमले में शहीद हुए वीर जवानों को पुष्पांजलि अर्पित की





