
विधेयक में लोकसभा और राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रावधान
संसद आज एक बड़े और ऐतिहासिक बदलाव की ओर कदम बढ़ाने जा रही है। महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े अहम विधेयक गुरुवार को लोकसभा में पेश किए जाएंगे, जिन्हें देश की राजनीतिक संरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है। परिसीमन को लेकर खासतौर पर दक्षिण भारत के राज्यों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है। इन राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद उनकी लोकसभा सीटों में कमी आ सकती है। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस चिंता को सिरे से खारिज करते हुए भरोसा दिलाया है कि किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा। सरकार के मुताबिक, सभी राज्यों की सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों के पुनर्निर्धारण को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है। संसद के विस्तारित सत्र की शुरुआत के साथ ही इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान तय माना जा रहा है। एक ओर सरकार इन प्रस्तावों को लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है, वहीं कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष परिसीमन का विरोध कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण को लंबे समय से एक प्रमुख मुद्दा बनाया हुआ है। ऐसे में विपक्ष खुलकर इसका विरोध करने की स्थिति में नहीं है, लेकिन परिसीमन के मुद्दे पर वह अपनी आपत्तियों पर कायम है।
संसद के बजट सत्र की तीन दिवसीय विस्तारित बैठक के पहले दिन केंद्र सरकार लोकसभा में बड़े बदलाव की नींव रखेगी। इसके तहत संविधान (131वां) संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा, जिसमें लोकसभा और राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रावधान शामिल है। महिला आरक्षण इसी प्रस्ताव का हिस्सा होगा। इसके अलावा परिसीमन विधेयक और केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक भी सदन में पेश किए जाएंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए परिसीमन में देश के किसी भी क्षेत्र, विशेषकर दक्षिणी राज्यों के साथ कोई अन्याय नहीं किया जाएगा। लोकसभा सीटों की अधिकतम संख्या 850 निर्धारित की गई है और इसमें किसी भी राज्य की सीट घटाने का कोई प्रावधान नहीं है। सरकार का तर्क है कि वर्ष 1976 के बाद से लोकसभा सीटों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार परिसीमन आवश्यक हो गया है। यह प्रक्रिया अंतिम प्रकाशित जनगणना 2011 के आधार पर पूरी की जाएगी। प्रत्येक राज्य के लिए अलग परिसीमन आयोग गठित होगा, जो सभी राजनीतिक दलों से विचार-विमर्श के बाद सीटों का अंतिम निर्धारण करेगा।
संसद के विस्तारित सत्र का कार्यक्रम इस प्रकार है
- 16 अप्रैल: लोकसभा में तीनों विधेयकों पर चर्चा, कुल 18 घंटे का समय निर्धारित
- 17 अप्रैल: लोकसभा में मतदान के साथ प्रक्रिया पूरी होगी
- 18 अप्रैल: राज्यसभा में विधेयकों को पेश किया जाएगा, जहां 10 घंटे की चर्चा के बाद मतदान होगा
पेश किए जाने वाले प्रमुख विधेयक
- संविधान (131वां) संशोधन विधेयक-2026
- परिसीमन विधेयक-2026
- संघ शासित क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक-2026
इन विधेयकों के जरिए देश की संसदीय व्यवस्था में व्यापक बदलाव की दिशा तय होने वाली है, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।





