यूपी: लक्ष्य से तीन फीसदी नंबर कम आने पर 10वीं की छात्रा ने की खुदकुशी

केंद्रीय विद्यालय की थी छात्रा, चाहत थी 95% की, पर आए 92% नंबर

कानपुर से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जहां दसवीं कक्षा में 92 प्रतिशत अंक हासिल करने के बावजूद एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली। छात्रा का लक्ष्य 95 प्रतिशत अंक प्राप्त करना था, और तीन फीसदी कम अंक आने से वह गहरे तनाव में आ गई। अर्मापुर स्थित केंद्रीय विद्यालय की छात्रा वैशाली सिंह ने गुरुवार शाम फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। बताया जा रहा है कि सीबीएसई 10वीं के परिणाम घोषित होने के बाद से ही वैशाली बेहद मायूस थी। उसने अपने कुछ दोस्तों को आत्महत्या से पहले एक वॉयस मैसेज भी भेजा, जिसमें उसने जीने की इच्छा खत्म होने और मां द्वारा उसकी पढ़ाई पर खर्च किए जा रहे पैसों के बेकार जाने की आशंका जताई थी। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और छात्रा का मोबाइल फोन जब्त कर जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।

पनकी के रतनपुर स्थित शिवालिक भवन की रहने वाली वैशाली के परिवार में उसकी मां काजल और 19 वर्षीय भाई प्रिंस हैं। दो वर्ष पहले उसके पिता वीरेंद्र सिंह का निधन हो चुका है। मां काजल एक मॉल में काम कर परिवार का पालन-पोषण करती हैं। घटना वाले दिन काजल काम पर गई थीं और दोपहर से शाम तक कई बार बेटी को फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने बेटे प्रिंस को कमरे में भेजा, जहां उसने वैशाली को फंदे से लटका पाया। आत्महत्या से पहले भेजे गए वॉयस मैसेज में वैशाली ने कहा था कि वह अब जीना नहीं चाहती और खुद को “जिंदा लाश” जैसा महसूस कर रही है। उसने यह भी कहा कि उसे डर है कि उसकी पढ़ाई पर मां का खर्च कहीं व्यर्थ न चला जाए। मां का आरोप है कि स्कूल की ओर से पढ़ाई का अत्यधिक दबाव बनाया जा रहा था, जिसके चलते वह देर रात तक पढ़ाई करती रहती थी और तनाव में रहने लगी थी। भाई प्रिंस ने भी स्कूल पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ शिक्षक उसकी बहन की तुलना उससे करते थे और उस पर बेहतर प्रदर्शन का दबाव बनाते थे। उनके मुताबिक, इसी वजह से वैशाली मानसिक दबाव में आ गई थी। हालांकि उसने 92 प्रतिशत अंक हासिल किए थे, लेकिन वह अपने लक्ष्य से पीछे रह जाने के कारण खुद को असफल मान बैठी।

विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में बच्चों पर अपेक्षाओं का बोझ बढ़ता जा रहा है, जो कई बार गंभीर मानसिक तनाव का कारण बनता है। ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों के साथ संवाद बनाए रखें और उन पर अनावश्यक दबाव न डालें। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि जीवन में अंक ही सब कुछ नहीं होते, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

विशिखा मीडिया

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