
नियम न मानने पर एक लाख रुपये का जुर्माना
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी स्कूलों में कक्षा 1 से 10वीं तक मराठी भाषा को अनिवार्य करने के नियम को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। इस निर्देश का पालन न करने वाले स्कूलों पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, साथ ही उनकी मान्यता रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में एक विस्तृत सरकारी आदेश (जीआर) जारी किया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 से ही मराठी को अनिवार्य विषय के रूप में लागू किया जा चुका है। यह व्यवस्था ‘महाराष्ट्र अनिवार्य शिक्षण एवं मराठी भाषा अधिगम अधिनियम, 2020’ के तहत प्रभावी है। नियमों के उल्लंघन पर सरकार ने चरणबद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया तय की है। सबसे पहले संबंधित स्कूल को नोटिस जारी किया जाएगा, जिसके बाद प्रबंधन को 15 दिनों के भीतर जवाब देना होगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा और अगले सत्र से मराठी विषय को अनिवार्य रूप से शुरू करने के निर्देश दिए जाएंगे। इसके साथ ही स्कूलों को 30 दिनों के भीतर अपील करने का अवसर भी मिलेगा। यदि इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं किया जाता, तो स्कूल की मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अंतिम निर्णय स्कूल शिक्षा आयुक्त द्वारा तीन महीने के भीतर लिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से राज्य में मराठी भाषा के प्रभावी शिक्षण को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
वहीं, सरकार द्वारा टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए भी मराठी भाषा को अनिवार्य करने के फैसले पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने इस निर्णय की आलोचना करते हुए कहा कि यह गरीब तबके पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला कदम है। उनका आरोप है कि इस तरह के नियमों के जरिए टैक्सी और रिक्शा चालकों से आर्थिक वसूली की जा रही है।






