यूपी: पूर्वांचल में धर्मांतरण का ट्रेंड बदला, सरकारी योजनाओं से वंचित होने के डर से नहीं बदलते हैं सरनेम

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में आशा कार्यकर्ताओं पर धर्म परिवर्तन कराने के आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि अब ऑनलाइन चंगाई सभाओं के माध्यम से यह प्रक्रिया चलाई जा रही है। धर्म बदलने वालों पर अब सरनेम बदलने का दबाव नहीं बनाया जाता। इसके पीछे मुख्य कारण यह बताया जा रहा है कि लोग सरकारी योजनाओं से वंचित न हो जाएं, इसी डर से वे आधिकारिक रूप से अपना नाम नहीं बदलते। जानकारी के अनुसार, जौनपुर समेत पूर्वांचल के 10 जिलों में प्रलोभन और आर्थिक मदद के नाम पर धर्मांतरण का नया तरीका अपनाया जा रहा है। ईसाई मिशनरियों ने अब अपनी रणनीति बदल ली है, धर्म परिवर्तन के बाद व्यक्ति का सरनेम वही रखा जाता है, ताकि सरकारी योजनाओं, एससी-एसटी और ओबीसी आरक्षण जैसी सुविधाओं का लाभ मिलता रहे। मामले में एक जौनपुर की आशा कार्यकर्ता का उदाहरण सामने आया है, जिसने खुद धर्म परिवर्तन किया और अब दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित कर रही है। उसने कहा, “मेरी पहचान वही है, बस एक लॉकेट पहन लिया है जो कपड़ों के अंदर रहता है। पुलिस की सख्ती के कारण अब चंगाई सभाएं मोबाइल के जरिए ऑनलाइन की जाती हैं। रविवार और शुक्रवार की सभाएं मुंबई से संचालित होती हैं।” उसने बताया कि स्थानीय स्तर पर सख्ती के कारण कई लोग अब वाराणसी जाकर सभाओं में हिस्सा लेते हैं। हाल ही में 10-11 लोग टेंपो से बनारस के भुल्लनपुर क्षेत्र में एक सभा में शामिल हुए, जहां 250 से अधिक लोग उपस्थित थे।
सुल्तानपुर के एक परिवार ने बताया कि उन्होंने बपतिस्मा ले लिया है और अब केवल यीशु को मानते हैं। हालांकि उनके परिजन अपने धर्म में हैं, परंतु वे भी घर पर प्रार्थना करते हैं। पहले सामूहिक सभाएं होती थीं, लेकिन प्रशासनिक सख्ती के बाद अब लोग अपने-अपने घरों में ही प्रार्थना करते हैं।

मिशनरियों का नया टारगेट: “फर्स्ट जनरेशन”
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, अब मिशनरियों का ध्यान सीधे गरीब या जनजातीय परिवारों पर नहीं है, बल्कि उनके बच्चों पर है। वे शादी, शिक्षा और इलाज के नाम पर आर्थिक सहायता देकर धीरे-धीरे परिवारों का विश्वास जीतते हैं। इस काम के लिए बिचौलियों की मदद ली जाती है, जिन्हें प्रति व्यक्ति धर्मांतरण कराने पर 25 से 50 हजार रुपये तक का कमीशन दिया जाता है।

धर्म परिवर्तन का तय “रेट”
जौनपुर के खुज्झी गांव के निवासी वीरेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि शादी या इलाज के बहाने लोगों को 25 हजार रुपये तक का लालच देकर धर्म परिवर्तन कराया जाता है। खलिया, भुल्लनडीह और केराकत जैसे इलाकों में हर गुरुवार सुबह और शाम को “चंगाई सभा” होती है, जिसमें लोगों के नाम रजिस्टर में दर्ज किए जाते हैं। प्रार्थना के दौरान प्रतिभागियों को यीशु के नाम का पानी पिलाया जाता है।
लोभ या लालच देकर धर्म परिवर्तन के हर मामले में छापेमारी कर सख्त कार्रवाई की जाती है। इस साल जिले में चार मामले दर्ज हुए हैं और आरोपियों को जेल भेजा गया है। ऐसे मामलों पर सख्ती आगे भी जारी रहेगी- डॉ. कौस्तुभ पुलिस अधीक्षक जौनपुर

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