
फरवरी में शीर्ष अदालत द्वारा पूर्व टैरिफ व्यवस्था को निरस्त किया गया था
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 24 फरवरी 2026 से अधिकांश देशों पर 10 प्रतिशत का अस्थायी वैश्विक टैरिफ लागू किया था, जिसकी वैधता 150 दिनों के लिए निर्धारित की गई थी। अब इस अवधि के समाप्त होने से पहले ही प्रशासन नए और अधिक स्थायी टैरिफ लागू करने की दिशा में सक्रिय हो गया है। फरवरी में शीर्ष अदालत द्वारा पूर्व टैरिफ व्यवस्था को निरस्त किए जाने के बाद ट्रंप सरकार ने अंतरिम उपाय के तौर पर आयात शुल्क लागू किए थे। हालांकि ये अस्थायी कर अब समाप्ति की ओर हैं। ऐसे में प्रशासन राजकोषीय आय को बनाए रखने और संरक्षणवादी आर्थिक नीति को और मजबूती देने के उद्देश्य से दीर्घकालिक टैरिफ व्यवस्था तैयार करने में लगा है। इसी क्रम में इस सप्ताह अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय दो महत्वपूर्ण जांचों पर सुनवाई करने जा रहा है, जिन्हें नए टैरिफ दौर की शुरुआत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। ये शुल्क तकनीकी रूप से आयातकों द्वारा अदा किए जाते हैं, लेकिन व्यवहार में इनका बोझ बढ़ी हुई कीमतों के रूप में उपभोक्ताओं पर ही पड़ता है, जो पहले से ही महंगाई के दबाव में हैं।
ट्रंप प्रशासन के नए टैरिफ प्रस्तावों को न्यायिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि यह पूर्व में खारिज किए गए प्रस्तावों की तुलना में अधिक सुदृढ़ कानूनी आधार पर टिके होंगे। साथ ही, प्रशासन यह भी जांच करेगा कि चीन, यूरोपीय संघ और जापान सहित 16 प्रमुख व्यापारिक साझेदार कहीं जरूरत से अधिक उत्पादन तो नहीं कर रहे, जिससे वैश्विक कीमतों में गिरावट आ रही है और अमेरिकी उद्योगों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। गौरतलब है कि जांच के दायरे में आने वाले ये देश अमेरिका के कुल आयात का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं, और इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2026 में ट्रंप प्रशासन ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था को पुनर्परिभाषित करने के उद्देश्य से आक्रामक टैरिफ नीति अपनाई थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लागू किए गए 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ के अतिरिक्त स्टील और एल्युमीनियम पर 25 प्रतिशत तथा चयनित फार्मास्यूटिकल उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क प्रस्तावित किया गया था।






