
आज के समय में कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिसकी बड़ी वजह हमारी बदलती जीवनशैली मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, मोटापा शरीर में हार्मोनल असंतुलन और सूजन को बढ़ाता है, जिससे कैंसर का खतरा कई गुना तक बढ़ सकता है। शोध बताते हैं कि मोटापा करीब 13 प्रकार के कैंसर के जोखिम से जुड़ा हुआ है। दरअसल, आधुनिक जीवन में सुविधाओं और स्वास्थ्य के बीच बढ़ता असंतुलन गंभीर समस्याओं को जन्म दे रहा है। अनियमित खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, अपर्याप्त नींद और बढ़ता स्क्रीन टाइम धीरे-धीरे शरीर को बीमारियों की ओर धकेल रहा है। इनमें सबसे आम समस्या मोटापा बनकर उभर रही है। यह केवल शरीर की बनावट को प्रभावित नहीं करता, बल्कि कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों की जड़ भी बनता जा रहा है।
अध्ययनों में यह सामने आया है कि शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल जैसी क्रॉनिक बीमारियों के साथ-साथ कैंसर का खतरा भी बढ़ाती है। मोटापे के कारण शरीर में हार्मोनल बदलाव, सूजन और मेटाबॉलिक गड़बड़ियां बढ़ती हैं, जो कैंसर के विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती हैं। एक हालिया अध्ययन में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मोटापा केवल एक या दो नहीं, बल्कि लगभग 13 प्रकार के कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। ऐसे में मोटापे को बीमारियों का “ओपन पास” कहना गलत नहीं होगा।
मोटापे और कैंसर का बढ़ता संबंध
विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त लोगों में कैंसर का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होता है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि मोटापा कम से कम 13 प्रकार के कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है। इसके आधार पर विशेषज्ञों ने चेताया है कि केवल वजन कम करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि लंबे समय तक संतुलित जीवनशैली अपनाना जरूरी है।
- इंग्लैंड में कैंसर के इलाज के लिए आने वाले आधे से अधिक मरीजों में पहले मोटापे के लक्षण पाए गए।
- विशेषज्ञों के अनुसार, इस जानलेवा बीमारी में मोटापे की भूमिका पहले की तुलना में कहीं अधिक गंभीर है।
अध्ययन में सामने आए अहम तथ्य
वर्ल्ड कैंसर रिसर्च फंड की डॉ. हेलेन क्रॉकर के अनुसार, यह अध्ययन बताता है कि बड़े क्लिनिकल निर्णय लेते समय मरीज की वर्तमान स्थिति के साथ-साथ उसके मोटापे के इतिहास को भी ध्यान में रखना जरूरी है। वहीं, कैंसर विशेषज्ञ प्रोफेसर साइमन लॉर्ड के नेतृत्व में किए गए शोध में पाया गया कि पहले का अधिक वजन इलाज की सफलता को भी प्रभावित कर सकता है।
- 79,271 मरीजों के डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड के आधार पर बीएमआई डेटा का विश्लेषण किया गया।
- विभिन्न प्रकार के कैंसर में मोटापे की दर अलग-अलग पाई गई।
- जिन कैंसरों में अचानक वजन घटना और भूख कम लगना जैसे लक्षण होते हैं, उनमें इलाज के समय मोटापे की दर कम देखी गई।
- इनमें पैंक्रियाटिक, गैस्ट्रोइसोफेजियल, आंत और फेफड़ों के कैंसर शामिल हैं।
- वहीं, गर्भाशय, स्तन और त्वचा कैंसर के मरीजों में इलाज की शुरुआत में मोटापा अधिक पाया गया।
वैज्ञानिकों का मानना है कि मोटापा शरीर में सूजन, हार्मोनल बदलाव और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करके कैंसर के खतरे को बढ़ाता है।
किन कैंसरों से जुड़ा है मोटापा?
इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने 2016 में ऐसे 13 प्रकार के कैंसर चिन्हित किए, जिनका संबंध मोटापे से पाया गया है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि हर मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति को कैंसर होगा, ऐसा जरूरी नहीं है, लेकिन यह जोखिम को बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कारक जरूर है। कैंसर रिसर्च यूके के अनुसार, वजन को नियंत्रित रखकर इन कैंसरों के खतरे को कम किया जा सकता है:

- स्तन कैंसर (रजोनिवृत्ति के बाद)
- आंत का कैंसर
- किडनी का कैंसर
- लिवर का कैंसर
- एंडोमेट्रियल कैंसर
- ओवेरियन कैंसर
- पेट का कैंसर
- थायरॉइड कैंसर
- भोजन की नली (इसोफेगस) का कैंसर
- पित्ताशय और अग्नाशय का कैंसर
- मल्टीपल मायलोमा
- गंभीर अवस्था का प्रोस्टेट कैंसर
- मेनिंगियोमा (ब्रेन ट्यूमर)
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और स्क्रीन टाइम में कमी लाकर मोटापे को नियंत्रित किया जा सकता है। इससे न केवल कैंसर बल्कि कई अन्य गंभीर बीमारियों के खतरे को भी कम किया जा सकता है।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लिए डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।






