
सीमांचल सहित करीब 16 जिले प्रभावित
बिहार के भागलपुर में स्थित 4.7 किलोमीटर लंबे विक्रमशिला सेतु का करीब 34 मीटर हिस्सा रविवार देर रात गंगा नदी में गिर गया। हालांकि, प्रशासन की सतर्कता से पहले ही ट्रैफिक रोक दिया गया था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। इस घटना का असर सीमांचल सहित करीब 16 जिलों की कनेक्टिविटी पर पड़ा है और रोजाना लगभग एक लाख लोगों के आवागमन पर असर पड़ा है। बताया जा रहा है कि पिछले 10 वर्षों में इस पुल की तीन बार मरम्मत हो चुकी है, जबकि मार्च 2026 में भी हाल ही में रिपेयर कार्य कराया गया था। पुल का निर्माण यूपी ब्रिज कॉर्पोरेशन द्वारा किया गया था। लापरवाही के आरोप में पथ निर्माण विभाग ने एक्जीक्यूटिव इंजीनियर को निलंबित कर दिया है। बिहार राज्य पुल निगम लिमिटेड के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि पुलिस और जिला प्रशासन की मुस्तैदी के कारण बड़ा नुकसान होने से बच गया। उन्होंने कहा कि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो जान-माल की बड़ी हानि हो सकती थी। मरम्मत के लिए डीपीआर पहले ही भेजा गया था और अब सेना की मदद लेने की भी कोशिश की जा रही है। स्थानीय लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।
घटना से पहले शाम के समय पुल के जॉइंट सस्पेंशन में करीब 10 इंच का धंसाव आया था, जिसके बाद देर रात एक स्लैब गंगा में गिर गया। उस दौरान पुल पर वाहनों की लंबी कतार लगी थी, लेकिन पुलिस की सतर्कता से सभी वाहनों को समय रहते हटा लिया गया। अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी के अनुसार, रात 12:35 बजे से स्लैब धंसना शुरू हुआ था, लेकिन उससे पहले ही ट्रैफिक रोक दिया गया था, जिससे कोई दुर्घटना नहीं हुई। पुल की स्थिति का आकलन करने के लिए जल्द ही हाई लेवल कमेटी का दौरा प्रस्तावित है। ट्रैफिक डीसीपी संजय कुमार ने बताया कि स्ट्रीट लाइट पोल संख्या 133 के पास एक्सपेंशन जॉइंट में गैप बढ़ने की सूचना मिलते ही दोनों ओर से यातायात बंद कर दिया गया। वहीं, सिटी डीसीपी-1 अजय चौधरी ने बताया कि पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई है और वाहनों को मुंगेर पुल की ओर डायवर्ट किया जा रहा है। नवगछिया और भागलपुर दोनों तरफ पुलिस बल तैनात किया गया है। नेशनल हाईवे के एसडीओ सुधीर कुमार के मुताबिक, नए स्लैब को तैयार कर स्थापित करने में कम से कम 15 दिन का समय लगेगा।

विक्रमशिला सेतु रोजाना करीब 50 हजार से अधिक वाहनों और एक लाख लोगों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग है, जो सीमांचल सहित 16 जिलों को भागलपुर से जोड़ता है। इसका निर्माण राबड़ी देवी के कार्यकाल में हुआ था। पुल में जॉइंट और एक्सपेंशन गैप की समस्या को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। वर्ष 2020 में भी इसकी मरम्मत की गई थी, जबकि हाल ही में वायरिंग क्षतिग्रस्त होने की खबरें भी सामने आई थीं, जिसे प्रशासन ने उस समय खारिज कर दिया था। पुल बंद होने के बाद बरारी घाट पर लोगों की भीड़ बढ़ गई है। नवगछिया, बिहपुर, कटिहार और पूर्णिया जाने वाले लोग नाव के सहारे गंगा पार कर रहे हैं। यात्रियों को नाव से उतरने के बाद करीब 5 किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय पर मेंटेनेंस नहीं होने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा है कि पहले ही पुल के गिरने की आशंका जताई गई थी, लेकिन सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया। करीब 30 दिन पहले ही पुल के पिलर संख्या 17, 18 और 19 की प्रोटेक्शन वॉल तेज बहाव के कारण क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसमें एक पिलर की दीवार पूरी तरह टूट गई थी। इंजीनियरों के अनुसार, गंगा के तेज बहाव, भारी नौकाओं और जहाजों के दबाव से पिलरों पर लगातार असर पड़ता है, जिससे संरचना कमजोर होती है। बाढ़ के समय यह खतरा और बढ़ जाता है। इससे पहले भी पुल के विभिन्न स्पैन के बीच एक्सपेंशन जॉइंट का गैप 1-2 इंच से बढ़कर करीब 6 इंच तक पहुंचने की बात सामने आई थी।






