
दिल्ली में 30 वर्षीय न्यायाधीश अमन कुमार शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। सामने आया है कि कथित आत्महत्या से एक रात पहले उन्होंने अपने पिता को फोन कर अपनी मानसिक स्थिति जाहिर की थी। फोन पर वह रोते हुए बोले थे, “पापा, मैं बहुत तनाव में हूं, अब मेरे लिए जीना मुश्किल हो गया है।” इस घटना के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कड़ी धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। अमन शर्मा की मौत के मामले में उनके पिता की शिकायत के आधार पर दक्षिण दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव थाने में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और धारा 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इससे यह केस अब एक सामान्य पारिवारिक विवाद से आगे बढ़कर आपराधिक जांच में तब्दील हो गया है। मृतक के पिता ने अपनी शिकायत में ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने अमन की पत्नी स्वाति मलिक, जो तीस हजारी कोर्ट में जज हैं, और उनकी साली निधि मलिक (आईएएस अधिकारी, वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में तैनात) को मुख्य आरोपी बनाया है। इसके अलावा स्वाति मलिक के माता-पिता और एक अन्य व्यक्ति का नाम भी एफआईआर में शामिल किया गया है। परिवार का आरोप है कि इन सभी द्वारा अमन को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था, जिसके चलते वह गहरे तनाव में आ गए और अंततः यह कठोर कदम उठाया।
जानकारी के अनुसार, अमन शर्मा 2 मई को दक्षिण दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित अपने सरकारी आवास में मृत पाए गए थे। वह कड़कड़डूमा कोर्ट में दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण में सचिव के पद पर कार्यरत थे। घटना की सूचना उनके बहनोई शिवम ने शनिवार दोपहर करीब 1:45 बजे पुलिस को दी थी। पोस्टमार्टम के बाद अमन का शव अलवर लाया गया, जहां रविवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उनकी पत्नी और ससुराल पक्ष का कोई भी सदस्य मौजूद नहीं था। पिता ने नम आंखों से बेटे को मुखाग्नि दी। अमन शर्मा के परिवार में उनकी पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं, जिनमें एक की उम्र एक वर्ष से भी कम है। उन्होंने 2018 में पुणे के सिम्बायोसिस लॉ स्कूल से बीए-एलएलबी की पढ़ाई पूरी की थी और 2021 में दिल्ली न्यायिक सेवा में शामिल हुए थे। उसी वर्ष उन्होंने अपनी बैचमेट स्वाति मलिक से प्रेम विवाह किया था। पुलिस के मुताबिक, अमन ने अपने घर के बाथरूम में फांसी लगाकर आत्महत्या की। हालांकि, परिवार की शिकायत के बाद मामले ने नया रुख ले लिया है। परिजनों का कहना है कि पिछले दो महीनों से अमन और उनकी पत्नी के बीच विवाद चल रहा था और उन पर लगातार मानसिक दबाव बनाया जा रहा था। घटना से एक रात पहले की फोन कॉल को इस केस में अहम माना जा रहा है। पिता के अनुसार, बेटे की हालत सुनकर वह उसी रात अलवर से दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे, लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही अमन की मौत हो चुकी थी।
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के हर पहलू की गहन जांच की जा रही है और सभी आरोपों की पुष्टि साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।






