
पर्याप्त सबूत न मिलने से सोहराबुद्दीन शेख के परिजनों की अपील खारिज
बॉम्बे हाईकोर्ट ने वर्ष 2005 के कथित फर्जी मुठभेड़ प्रकरण में निचली अदालत द्वारा 22 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को सही ठहराते हुए सोहराबुद्दीन शेख के परिजनों की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए साजिश का आरोप न्यायिक कसौटी पर खरा नहीं उतरता। हाईकोर्ट ने सीबीआई की विशेष अदालत के उस निर्णय को बरकरार रखा, जिसमें वर्ष 2005 के इस बहुचर्चित मामले में सभी 22 आरोपियों को बरी किया गया था। यह मामला गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की मौत से जुड़ा है।
मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की खंडपीठ ने गुरुवार को सोहराबुद्दीन के भाइयों रुबाबुद्दीन और नयाबुद्दीन द्वारा दायर अपीलों को निरस्त कर दिया। इन अपीलों में दिसंबर 2018 में विशेष अदालत द्वारा दिए गए बरी के फैसले को चुनौती दी गई थी। बरी किए गए 22 आरोपियों में 21 गुजरात और राजस्थान पुलिस के निचले स्तर के अधिकारी शामिल थे, जिन पर अपहरण कर कथित फर्जी मुठभेड़ों में तीनों की हत्या करने का आरोप था। एक अन्य आरोपी गुजरात स्थित एक फार्महाउस का मालिक था, जहां सोहराबुद्दीन और कौसर बी को कथित रूप से अवैध रूप से रखा गया था। विशेष अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि अभियोजन पक्ष साजिश रचे जाने या आरोपियों की संलिप्तता को प्रमाणित करने में विफल रहा। अप्रैल 2019 में इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी। वहीं, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी थी कि वह निचली अदालत के फैसले को स्वीकार करती है और इसके खिलाफ अपील नहीं करेगी।
सीबीआई के अनुसार, सोहराबुद्दीन शेख को नवंबर 2005 में अहमदाबाद के पास गुजरात पुलिस द्वारा कथित मुठभेड़ में मार दिया गया था। इसके कुछ दिन बाद उनकी पत्नी कौसर बी की भी हत्या कर दी गई थी। इसके लगभग एक वर्ष बाद, दिसंबर 2006 में मुख्य गवाह माने जा रहे तुलसीराम प्रजापति की भी कथित मुठभेड़ में मौत हो गई थी। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई को सौंपा गया था और बाद में इसकी सुनवाई मुंबई स्थानांतरित की गई। अपील में आरोप लगाया गया था कि मुकदमे की प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं और गवाहों के बयान सही तरीके से दर्ज नहीं किए गए। हालांकि, विशेष अदालत ने यह मानते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
मामले की प्रमुख घटनाओं की समयरेखा
- 22 नवंबर 2005: सोहराबुद्दीन शेख, कौसर बी और तुलसीराम प्रजापति को बस से यात्रा के दौरान हिरासत में लिया गया।
- 22–25 नवंबर 2005: शेख और कौसर बी को अहमदाबाद के पास एक फार्महाउस में रखा गया, जबकि प्रजापति को उदयपुर जेल भेजा गया।
- 26 नवंबर 2005: सोहराबुद्दीन शेख की कथित फर्जी मुठभेड़ में मौत।
- 29 नवंबर 2005: कौसर बी की हत्या और शव को नष्ट किए जाने का आरोप।
- 27 दिसंबर 2006: तुलसीराम प्रजापति की कथित मुठभेड़ में मौत।
- 2010: सुप्रीम कोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंपी।
- 2012: मामला गुजरात से मुंबई स्थानांतरित किया गया।
- 2018: विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को बरी किया।
- 2019: फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर।
- 2026: हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर बरी के फैसले को बरकरार रखा।
इस फैसले के साथ ही लंबे समय से चल रहे इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है।






